संदेश

मई, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

मार्टिन लूथर किंग JR.

चित्र
मार्टिन लूथर किंग JR. मार्टिन लूथर किंग का जन्म 15 जनवरी, 1929 को  अटलांटा, जॉर्जिया   में हुआ था। किंग ने  पेंसिल्वेनिया  के स्कूल में तीन साल तक पढ़ाई की। वहाँ उन्होंने अहिंसक विरोध के बारे में सीखा। 15 साल की उम्र में उन्होंने अटलांटा के  मोरहाउस कॉलेज   में दाखिला लिया तथा 1948 में स्नातक की उपाधि प्राप्त की। किंग ने 1955 में मैसाचुसेट्स में  बोस्टन विश्वविद्यालय  से डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की। 1954 में, किंग  मोंटगोमरी , अलबामा  में एक बैपटिस्ट चर्च के पादरी भी बने। कम उम्र में ही उनके माता-पिता ने उन्हें सिखाया कि अश्वेत होने से वे गोरों से अलग नहीं हो जाते, क्योंकि ईश्वर ने सभी मनुष्यों को समान बनाया है। उन्हें बचपन में ही भेदभाव का सामना करना पड़ा था। इसलिए, उनका एक सपना था कि वे एक दिन बड़े होकर इसे रोकेंगे। कॉलेज में दाखिला लेने के बाद उन्हें अपने विचारों को दुनिया के सामने व्यक्त करने का अवसर मिला। मार्टिन लूथर किंग को नागरिक अधिकार आंदोलन के सबसे महत्वपूर्ण अफ्रीकी-अमेरिकी नेताओं में से एक माना जाता है। वह अफ्रीकी-अमेरिकिय...

फ्रांसीसी क्रांति में महिलाओं की भूमिका

  फ्रांसीसी क्रांति में महिलाओं की भूमिका परिचय:- 1789 से लेकर 1795 तक की अवधि में क्रांतिकारी गतिविधियों में समाज की भिन्न वर्गों की महिलाओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा। इन महिलाओं के योगदान के बिना क्रांति और उसकी उपलब्धियों की कल्पना भी नहीं की जा सकती। क्रांति में महिलाओं की भूमिका सक्रिय और महत्वपूर्ण रही। पुरुष के साथ कंधे से कंधा मिलाकर महिलाओं ने एक ऐसे समाज की स्थापना की जो स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के आदर्श पर टिका था। किंतु अपने अधिकारों को प्राप्त करने के लिए उन्हें पुरुषों के विरुद्ध संघर्ष भी करना पड़ा। उपर्युक्त बातों से हटकर महिलाओं के विषय में सबसे प्रमुख बात यह है कि 1970 तक फ्रांसीसी क्रांति के इतिहास लेखन में महिलाओं को कोई स्थान प्राप्त नहीं था। लंबे समय तक महिलाएं इतिहास में छुपी रहे और उन पर कोई शोध कार्य नहीं हुआ। 1970 के दशक में इस कमी को दूर करने का प्रयास किया गया। 1970 में एक अमेरिकी जेन आबेर द्वारा पहला ऐसा लेख लिखा गया जो क्रांति की महिलाओं से संबंधित था। इस लेख के बाद फ्रांसीसी क्रांति में महिलाओं की भूमिका पर शोध कार्य आरंभ हुए।  इस लेख के बाद ...