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जापानी साम्राज्यवाद (1894 से 1945) || कोरिया और मंचूरिया

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                                                        जापानी साम्राज्यवाद (1894 से 1945) कोरिया और मंचूरिया मेजी काल की सबसे बड़ी पहचान राष्ट्रवाद थी। 19वीं सदी के उत्तरार्ध में जापान ने आधुनिकीकरण की शुरुआत की। यह माना गया कि जापान को बचे रहने के लिए आधुनिक सेना और मज़बूत औद्योगिक आधार ज़रूरी हैं। तोकुगावा काल में जापान दुनिया से काफ़ी कटा हुआ था। दूसरे देशों के साथ उसके संबंधों का रूप सबसे पहले पश्चिमी साम्राज्यवाद के संदर्भ से तय हुआ, जिसने संकट की भावना पैदा की। दरअसल विद्वान ई. एच. नॉर्मन आधुनिक जापानी राष्ट्रवाद को 'प्रतिक्रियात्मक राष्ट्रवाद' मानते हैं। यह राष्ट्र की चेतना और आधुनिक राज्य बनाने की तुरंत ज़रूरत का एहसास था, जो जापान में पश्चिम के सैन्य कब्ज़े या सांस्कृतिक उपनिवेशीकरण के डर से पैदा हुआ। इस तरह साम्राज्यवाद एक नए अंतरराष्ट्रीय माहौल की देन था। जापानी विस्तार एशियाई महाद्वीप पर केंद्रित रहा और खास तौर पर चीन और कोरिया के विर...

इंशा साहित्य

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इंशा साहित्य  इंशा एक अरबी शब्द है जिसका अर्थ रचना अथवा निर्माण है। समय बीतने के साथ इंशा का तात्पर्य गद्य लेखन, पत्र, दस्तावेज़ एवं राजकीय कागजात की रचना से लगाया जाने लगा। इंशा गद्य लेखन का एक विशेष तरीका होता था जो साधारण गद्य लेखन से भिन्न था। धीरे धीरे यह शैली अरबी एवं फ़ारसी का एक विशिष्ट रूप बन गई। इंशा साहित्य को इसकी खूबियों की वजह से पढ़ा जाने लगा, इसकी अच्छाइयों और खामियों को जाना जाने लगा। पत्र लेखन व अन्य दस्तावेज इसका हिस्सा बने और इसकी अपनी एक अलग पहचान बन गयी। पत्र व्यवहार संदेशों को न केवल एक जगह से दूसरी जगह ले जाने का काम करते थे बल्कि साहित्य दृष्टि से भी बेहतरीन थे। उस समय के इतिहास को जानने के लिए उन्हें महत्वपूर्ण स्त्रोत माना जाता है। इंशा साहित्य से हमें मध्यकाल में प्रशासन के संचालन, सामाजिक-सांस्कृतिक स्थितियों और विचारों के विषय में भी प्राथमिक जानकरी उपलब्ध कराते है।  इंशा लेखन का इस्तेमाल अपनी आंतरिक भावनाओं को व्यक्त करने के लिए भी किया जाता था, किन्तु इसको लिखने की अपनी एक कला थी। इसे अर्थपूर्ण भाषा में लिखा जाता था। इसमें शब्दों का च...