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जापानी साम्राज्यवाद (1894 से 1945) || कोरिया और मंचूरिया

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                                                        जापानी साम्राज्यवाद (1894 से 1945) कोरिया और मंचूरिया मेजी काल की सबसे बड़ी पहचान राष्ट्रवाद थी। 19वीं सदी के उत्तरार्ध में जापान ने आधुनिकीकरण की शुरुआत की। यह माना गया कि जापान को बचे रहने के लिए आधुनिक सेना और मज़बूत औद्योगिक आधार ज़रूरी हैं। तोकुगावा काल में जापान दुनिया से काफ़ी कटा हुआ था। दूसरे देशों के साथ उसके संबंधों का रूप सबसे पहले पश्चिमी साम्राज्यवाद के संदर्भ से तय हुआ, जिसने संकट की भावना पैदा की। दरअसल विद्वान ई. एच. नॉर्मन आधुनिक जापानी राष्ट्रवाद को 'प्रतिक्रियात्मक राष्ट्रवाद' मानते हैं। यह राष्ट्र की चेतना और आधुनिक राज्य बनाने की तुरंत ज़रूरत का एहसास था, जो जापान में पश्चिम के सैन्य कब्ज़े या सांस्कृतिक उपनिवेशीकरण के डर से पैदा हुआ। इस तरह साम्राज्यवाद एक नए अंतरराष्ट्रीय माहौल की देन था। जापानी विस्तार एशियाई महाद्वीप पर केंद्रित रहा और खास तौर पर चीन और कोरिया के विर...

1848 की क्रांतियां

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1848 की क्रांति 1848 का वर्ष यूरोप के इतिहास में " क्रांति का वर्ष " माना जाता है I उस वर्ष यूरोप में छोटी बड़ी 17 क्रांतियां हुई I सर्वप्रथम 14 मार्च को वियना में विद्रोह हुआ जिसके फलस्वरूप मेटरनिख को ऑस्ट्रिया छोड़कर भागना पड़ा I उसी सप्ताह इटली, जर्मनी, बोहेमिया, हंगरी, कोटिया में विद्रोह की आग भड़क उठी I 15 मार्च को पोप के राज्य में विद्रोह की लहर फ़ैल गयी और 18 मार्च को मिलान निवासियों ने विद्रोह का झण्डा खड़ा कर दिया I 22 मार्च को वेनिस ने अपनी स्वतंत्रता की घोषणा कर और दूसरे ही दिन सार्डिनिया के राजा चार्ल्स एल्बर्ट ने ऑस्ट्रिया  के विरुद्ध युद्ध की घोषणा कर दी I इसके पहले ही जर्मनी में 15 मार्च को बर्लिन में विद्रोह हो चूका था और फेड्रिक विलियम को विवश होकर समस्त जर्मन के लिए वैधानिक शासन का सिद्धांत स्वीकार करना पड़ा था I बवेरिया के लोगो ने अपने राजा को सिंहासन त्यागने पर विवश किया और अपने लिए एक उदार शासन स्थापित किया I ऐसे ही विद्रोह डेनमार्क , हॉलैंड, आयरलैंड आदि देशों में हुए I यहां तक की इंग्लैंड भी इस क्रांति से अछूता नहीं रह सका I  इतिहासकार हाब्सवाम के अनु...