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पैट्रीशियन तथा प्लीबियन का संघर्ष

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  पैट्रीशियन तथा प्लीबियन का संघर्ष  “रोम में 510 ईसापूर्व में राजशाही का अंत हुआ तथा गणतंत्र की शुरुआत हुई। जिसमें राजनितिक सत्ता कुलीनों के हांथो में रही तथा उन्होंने इससे अकूत धन कमाया। जिसके चलते आमिर और गरीब के बीच की खाई बढ़ती गयी तथा निम्न वर्ग इनसे नाराज रहने लगा। इस प्रकार प्राचीन रोमन समाज दो वर्गो में विभाजित था - पैट्रिशियन और प्लीबियन । पैट्रिशियन में कुलीन वर्ग शामिल थे जो आर्थिक, राजनितिक और सामाजिक रूप से संपन्न थे। प्लीबियन में आम लोग, किसान तथा मजदुर शामिल थे। इनके बीच होने वाले संघर्ष को "श्रेणियों का टकराव" तथा "कॉन्फ्लिक्ट ऑफ द ऑर्डर्स" के नाम से जाना जाता है जो लगभग 494 ई• पू• से 287 ई• पू• तक चला। रोमन इतिहासकार टाइटस लिवियस के अनुसार, प्लीबियन और पैट्रीशियन के बीच संघर्ष एक सामाजिक और आर्थिक संघर्ष था, जिसमें प्लीबियन ने अपने अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी। विद्वान कार्ल मार्क्स के अनुसार यह इतिहास का सबसे पहला 'वर्ग-संघर्ष' है जिसने बाद के सामाजिक बदलावों की नींव रखी। वैवाहिक प्रतिबंध - 445 ई• पू• के बाद पैट्रिशियन और प्लीबियन के ...

नवीन आर्थिक नीति (NEP)

नवीन आर्थिक नीति (NEP) नई आर्थिक नीति (NEP) को 1921 में व्लादिमीर लेनिन द्वारा सोवियत अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के लिए शुरू किया गया था। इसके अंतर्गत छोटे व्यवसायों को निजी तौर पर काम करने की अनुमति दी गई। इसका प्रथम उद्देश्य किसानो से अतिरिक्त उत्पादन की जगह कर वसूल करना था। किसान अब अपने उत्पादन को कर चुकाने के बाद बाजार में बेच सकते थे और तैयार माल खरीद सकते थे। जिससे जमाखोरी की संभावना कम हो गई और शहरी केंद्रों में भोजन की आपूर्ति बढ़ गई। व्यक्तिगत व्यापार की भी इजाजत दे दी गई। बड़े व मध्यम औद्योगिक संस्थान विदेशी पूंजीपतियों को दे दिए गए। व्यवस्था का केंद्रीकरण खत्म कर दिया गया तथा स्थानीय आर्थिक समितियों के अधिकारों में वृद्धि की गई। संस्थाओं को कच्चा माल बेचने की स्वतंत्रता मिल गई। अनेक कारखाने जिन पर राज्य पूंजी लगाता था, लाभ व हानि के सिद्धांत में बदल दिये गये। इतना ही नहीं सार्वजनिक अनिवार्य श्रम खत्म कर दिया गया। मजदूर प्रणाली को समाजवादी सिद्धांत के अनुसार स्थापित किया गया। श्रमिको को श्रम व गुण के अनुसार ही वेतन दिया जाने लगा। जबकि गृहयुद्ध के दौरान कुशल व अकुशल मजदू...