वारकरी आंदोलन
वारकरी आंदोलन वारकरी आंदोलन की शुरुआत 13 शताब्दी में महाराष्ट्र में हुई। पंडुलिक को इसका प्रथम संत माना जाता है। पंढरपुर वारकरी आंदोलन का प्रमुख केंद्र था। अधिकांश वारकरी संत विठोबा की पूजा करते थे जिन्हे विष्णु का अवतार माना जाता है। वारकारी संतो की संख्या 50 से अधिक थी। इसके प्रमुख संतो में ज्ञानेश्वर, नामदेव, एकनाथ, तुकाराम, और रामदास शामिल है। दार्शनिक शिक्षाएं वारकरी संतो के अनुसार भगवान् तक पहुँचने का रास्ता प्रेम और मानवता की सेवा से होकर जाता है और यह रास्ता सभी के लिए खुला है। साथ ही उनका मानना था की इसपर केवल पंडितों और ब्राह्मणों का ही विशेष अधिकार नहीं है। इनके अनुसार पुरोहित वर्ग भगवान पर अधिकार होने का दावा करते है। वह नहीं जानते की दिव्य को वश में नहीं किया जा सकता, बल्कि सेवा के माध्यम से ही उसका अनुसरण किया जा सकता है। वारकरी सम्रदाय का उद्देश्य धार्मिक प्रथाओं को दैनिक जीवन में अधिक सुलभ बनाना था। विद्वान सुविरा जायसवाल के अनुसार भगवान को केवल एक समुदाय की संपत्ति के रक्षक और मालिक के रूप में देखने से लेकर भगवान को एक सार्वभौमिक ...