संदेश

मुगल काल में संस्कृत

चित्र
  मुगल काल में संस्कृत मुग़ल साम्राज्य के इतिहास को आमतौर पर फ़ारसी ग्रंथों जैसे अकबरनामा, आइन-ए-अकबरी और पादशाहनामा के ज़रिए पढ़ा जाता है। चूँकि फ़ारसी प्रशासन की सरकारी भाषा थी, इसलिए लंबे समय तक इतिहासकार यह मानते रहे कि मुग़ल राजनीतिक और सांस्कृतिक जीवन को केवल फ़ारसी स्रोतों से ही समझा जा सकता है। लेकिन आधुनिक इतिहासकारों ने इस सीमित नज़रिए को चुनौती दी है और मुग़ल भारत के इतिहास को समझने में संस्कृत तथा स्थानीय भाषाओं के ग्रंथों के महत्व को उजागर किया है। ऑड्रे ट्रश्के, कुमकुम चटर्जी, डेविड शुलमन, क्रिस्टोफ़र मिन्कोव्स्की और संजय सुब्रह्मण्यम जैसे विद्वानों का तर्क है कि संस्कृत स्रोत मुग़ल इतिहास के उन पहलुओं को सामने लाते हैं जिन्हें फ़ारसी दरबारी इतिहास अक्सर नज़रअंदाज़ कर देते हैं। ये ग्रंथ क्षेत्रीय राजनीति, धार्मिक समझौतों, बौद्धिक आदान-प्रदान, सामाजिक जीवन और मुग़ल शासकों तथा भारतीय परंपराओं के बीच के सांस्कृतिक संबंधों की जानकारी देते हैं। संस्कृत और मुग़ल दरबार संस्कृत विद्वानों को संरक्षण देकर और बड़े पैमाने पर अनुवाद करके, मुग़ल शासक राजनीतिक वैधता हासिल करना...

जापान पर अमेरिकी अधिकार (1945–1952)

चित्र
  जापान पर अमेरिकी अधिकार (1945–1952) दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जापान एशिया के अन्य देशों पर कब्ज़ा करके अपनी ताकत बढ़ाना चाहता था। जापान ने 1931 में मंचूरिया पर हमला किया और 1937 में चीन पर आक्रमण करके दूसरा चीन-जापान युद्ध शुरू किया। जापान, जर्मनी और इटली के साथ मिलकर 'धुरी शक्तियों' (एक्सिस पावर्स) का हिस्सा बना। 7 दिसंबर 1941 को जापान ने अमेरिका के पर्ल हार्बर नौसैनिक अड्डे पर हमला किया, जिसके बाद अमेरिका भी युद्ध में शामिल हो गया। अगस्त 1945 में अमेरिका ने हिरोशिमा और नागासाकी शहरों पर परमाणु बम गिराए, जिसमें बहुत लोग मारे गए और भारी तबाही हुई। इसके तुरंत बाद, 15 अगस्त 1945 को जापान ने आत्मसमर्पण कर दिया और जापान के लिए दूसरा विश्व युद्ध खत्म हो गया। यह सिर्फ एक सैन्य हार नहीं थी, बल्कि मेइजी काल से चले आ रहे शाहीतंत्र के अंत की शुरुआत भी थी। युद्ध के बाद अमेरिकी सेना ने जापान पर कब्ज़ा किया और बड़े बदलाव शुरू किए। इस दौरान जापान की राजनीति, अर्थव्यवस्था और समाज में जबरदस्त बदलाव आया। अमेरिका के जनरल डगलस मैकआर्थर के नेतृत्व ने पूरे देश को बदल दिया। डगलस का मकसद था -स...

जापानी साम्राज्यवाद (1894 से 1945) || कोरिया और मंचूरिया

चित्र
                                                        जापानी साम्राज्यवाद (1894 से 1945) कोरिया और मंचूरिया मेजी काल की सबसे बड़ी पहचान राष्ट्रवाद थी। 19वीं सदी के उत्तरार्ध में जापान ने आधुनिकीकरण की शुरुआत की। यह माना गया कि जापान को बचे रहने के लिए आधुनिक सेना और मज़बूत औद्योगिक आधार ज़रूरी हैं। तोकुगावा काल में जापान दुनिया से काफ़ी कटा हुआ था। दूसरे देशों के साथ उसके संबंधों का रूप सबसे पहले पश्चिमी साम्राज्यवाद के संदर्भ से तय हुआ, जिसने संकट की भावना पैदा की। दरअसल विद्वान ई. एच. नॉर्मन आधुनिक जापानी राष्ट्रवाद को 'प्रतिक्रियात्मक राष्ट्रवाद' मानते हैं। यह राष्ट्र की चेतना और आधुनिक राज्य बनाने की तुरंत ज़रूरत का एहसास था, जो जापान में पश्चिम के सैन्य कब्ज़े या सांस्कृतिक उपनिवेशीकरण के डर से पैदा हुआ। इस तरह साम्राज्यवाद एक नए अंतरराष्ट्रीय माहौल की देन था। जापानी विस्तार एशियाई महाद्वीप पर केंद्रित रहा और खास तौर पर चीन और कोरिया के विर...