प्रबोधन या प्रबुद्धवाद (Enlightenment)
प्रबोधन (Enlightenment) प्रबोधन या प्रबुद्धवाद (Enlightenment) 17वीं और 18वीं शताब्दी में यूरोप में विकसित हुआ एक महत्वपूर्ण बौद्धिक और वैचारिक आंदोलन था। इसका मुख्य आधार तर्क, विवेक, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और व्यक्तिगत स्वतंत्रता था। प्रबोधन के विचारकों का मानना था कि मनुष्य अपनी बुद्धि और तर्क के माध्यम से समाज, राजनीति, धर्म और प्रकृति से जुड़े प्रश्नों को समझ सकता है। विद्वान पीटर गे (Peter Gay) के अनुसार प्रबोधन एक बौद्धिक आंदोलन था जिसमें तर्क और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को महत्व दिया गया। प्रबोधन ने परंपरागत मान्यताओं, निरंकुश राजतंत्र, धार्मिक कट्टरता और अंधविश्वास पर प्रश्न उठाए। इसके प्रमुख विचारकों में रेने देकार्ते, जॉन लॉक, डिडरो, आइजक न्यूटन, मांटेस्क्यू, वॉल्तेयर, जां-जाक रूसो, एडम स्मिथ, सीजर बिकारिया आदि शामिल थे। प्रबोधन का मूल विचार वैज्ञानिक ज्ञान को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। मानव मस्तिष्क को अंधविश्वासों से मुक्त होना चाहिए प्राकृतिक शक्तियाँ समस्त ब्रह्मांड का संचालन करती हैं। प्राकृतिक घटनाओं को समझने के लिए वैज्ञानिक पद्धति का प्रयोग किया जाना चाहिए। व...