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जापानी साम्राज्यवाद (1894 से 1945) || कोरिया और मंचूरिया

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                                                        जापानी साम्राज्यवाद (1894 से 1945) कोरिया और मंचूरिया मेजी काल की सबसे बड़ी पहचान राष्ट्रवाद थी। 19वीं सदी के उत्तरार्ध में जापान ने आधुनिकीकरण की शुरुआत की। यह माना गया कि जापान को बचे रहने के लिए आधुनिक सेना और मज़बूत औद्योगिक आधार ज़रूरी हैं। तोकुगावा काल में जापान दुनिया से काफ़ी कटा हुआ था। दूसरे देशों के साथ उसके संबंधों का रूप सबसे पहले पश्चिमी साम्राज्यवाद के संदर्भ से तय हुआ, जिसने संकट की भावना पैदा की। दरअसल विद्वान ई. एच. नॉर्मन आधुनिक जापानी राष्ट्रवाद को 'प्रतिक्रियात्मक राष्ट्रवाद' मानते हैं। यह राष्ट्र की चेतना और आधुनिक राज्य बनाने की तुरंत ज़रूरत का एहसास था, जो जापान में पश्चिम के सैन्य कब्ज़े या सांस्कृतिक उपनिवेशीकरण के डर से पैदा हुआ। इस तरह साम्राज्यवाद एक नए अंतरराष्ट्रीय माहौल की देन था। जापानी विस्तार एशियाई महाद्वीप पर केंद्रित रहा और खास तौर पर चीन और कोरिया के विर...

1857 के विद्रोह में समजिक वर्गो की भूमिका

प्रश्न:- 1857 के विद्रोह में विभिन्न सामाजिक वर्गों के भूमिका की व्याख्या कीजिए। परिचय:- 1857 का विद्रोह मध्य और उत्तरी भारत के कुछ भागों में घटित हुआ। इस विद्रोह में दोनों ओर से असाधारण हिंसा का सहारा लिया गया। इस विद्रोह के चलते अंग्रेजों ने सार्वजनिक रूप से फांसी दी, विद्रोहियों को तोप से उड़ाया और मनमाने ढंग से गांवों को जलाना उनके विद्रोह-विरोधी कदमों में शामिल था। विद्रोहियों ने भी निर्ममता से गोरे नागरिकों के स्त्रियों और बच्चों की हत्या की। इस विद्रोह ने ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन का अंत कर दिया और भारतीय साम्राज्य को ब्रिटेन की महारानी ने अपने अधीन ले लिया। इस विद्रोह को लंबे समय तक सैनिक विद्रोह समझा जाता रहा है लेकिन वास्तव में इस विद्रोह में उत्तर -भारत के दुखी ग्रामीण समाज की भी हिस्सेदारी थी। यह विद्रोह मेरठ से शुरू होते हुए दिल्ली और बाद में पश्चिमी प्रांत और अवध के सेना -केंद्रों तक फैल गया और जल्द ही उसने एक नागरिक विद्रोह का रूप ले लिया। इस विद्रोह में शामिल होने के लिए समाज के विभिन्न वर्गों के अपने-अपने हित शामिल थे, किंतु विभिन्न सामाजिक वर्गों का दुश्मन केवल एक ही ...