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जापानी साम्राज्यवाद (1894 से 1945) || कोरिया और मंचूरिया

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                                                        जापानी साम्राज्यवाद (1894 से 1945) कोरिया और मंचूरिया मेजी काल की सबसे बड़ी पहचान राष्ट्रवाद थी। 19वीं सदी के उत्तरार्ध में जापान ने आधुनिकीकरण की शुरुआत की। यह माना गया कि जापान को बचे रहने के लिए आधुनिक सेना और मज़बूत औद्योगिक आधार ज़रूरी हैं। तोकुगावा काल में जापान दुनिया से काफ़ी कटा हुआ था। दूसरे देशों के साथ उसके संबंधों का रूप सबसे पहले पश्चिमी साम्राज्यवाद के संदर्भ से तय हुआ, जिसने संकट की भावना पैदा की। दरअसल विद्वान ई. एच. नॉर्मन आधुनिक जापानी राष्ट्रवाद को 'प्रतिक्रियात्मक राष्ट्रवाद' मानते हैं। यह राष्ट्र की चेतना और आधुनिक राज्य बनाने की तुरंत ज़रूरत का एहसास था, जो जापान में पश्चिम के सैन्य कब्ज़े या सांस्कृतिक उपनिवेशीकरण के डर से पैदा हुआ। इस तरह साम्राज्यवाद एक नए अंतरराष्ट्रीय माहौल की देन था। जापानी विस्तार एशियाई महाद्वीप पर केंद्रित रहा और खास तौर पर चीन और कोरिया के विर...

फ्रांसीसी क्रांति में महिलाओं की भूमिका

  फ्रांसीसी क्रांति में महिलाओं की भूमिका परिचय:- 1789 से लेकर 1795 तक की अवधि में क्रांतिकारी गतिविधियों में समाज की भिन्न वर्गों की महिलाओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा। इन महिलाओं के योगदान के बिना क्रांति और उसकी उपलब्धियों की कल्पना भी नहीं की जा सकती। क्रांति में महिलाओं की भूमिका सक्रिय और महत्वपूर्ण रही। पुरुष के साथ कंधे से कंधा मिलाकर महिलाओं ने एक ऐसे समाज की स्थापना की जो स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के आदर्श पर टिका था। किंतु अपने अधिकारों को प्राप्त करने के लिए उन्हें पुरुषों के विरुद्ध संघर्ष भी करना पड़ा। उपर्युक्त बातों से हटकर महिलाओं के विषय में सबसे प्रमुख बात यह है कि 1970 तक फ्रांसीसी क्रांति के इतिहास लेखन में महिलाओं को कोई स्थान प्राप्त नहीं था। लंबे समय तक महिलाएं इतिहास में छुपी रहे और उन पर कोई शोध कार्य नहीं हुआ। 1970 के दशक में इस कमी को दूर करने का प्रयास किया गया। 1970 में एक अमेरिकी जेन आबेर द्वारा पहला ऐसा लेख लिखा गया जो क्रांति की महिलाओं से संबंधित था। इस लेख के बाद फ्रांसीसी क्रांति में महिलाओं की भूमिका पर शोध कार्य आरंभ हुए।  इस लेख के बाद ...