संदेश

18वीं शताब्दी “अंधकार युग” लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

जापानी साम्राज्यवाद (1894 से 1945) || कोरिया और मंचूरिया

चित्र
                                                        जापानी साम्राज्यवाद (1894 से 1945) कोरिया और मंचूरिया मेजी काल की सबसे बड़ी पहचान राष्ट्रवाद थी। 19वीं सदी के उत्तरार्ध में जापान ने आधुनिकीकरण की शुरुआत की। यह माना गया कि जापान को बचे रहने के लिए आधुनिक सेना और मज़बूत औद्योगिक आधार ज़रूरी हैं। तोकुगावा काल में जापान दुनिया से काफ़ी कटा हुआ था। दूसरे देशों के साथ उसके संबंधों का रूप सबसे पहले पश्चिमी साम्राज्यवाद के संदर्भ से तय हुआ, जिसने संकट की भावना पैदा की। दरअसल विद्वान ई. एच. नॉर्मन आधुनिक जापानी राष्ट्रवाद को 'प्रतिक्रियात्मक राष्ट्रवाद' मानते हैं। यह राष्ट्र की चेतना और आधुनिक राज्य बनाने की तुरंत ज़रूरत का एहसास था, जो जापान में पश्चिम के सैन्य कब्ज़े या सांस्कृतिक उपनिवेशीकरण के डर से पैदा हुआ। इस तरह साम्राज्यवाद एक नए अंतरराष्ट्रीय माहौल की देन था। जापानी विस्तार एशियाई महाद्वीप पर केंद्रित रहा और खास तौर पर चीन और कोरिया के विर...

18वीं शताब्दी “अंधकार युग”

चित्र
18वीं शताब्दी “अंधकार युग” 18वीं शताब्दी में भारत में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए जिसने सत्ता के ढांचे को पूरी तरह बदल दिया। इन परिवर्तनों में प्रमुख थे, मुगल साम्राज्य की सत्ता का क्षेत्रीय शक्तियों में हस्तांतरण तथा राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक क्षेत्र में आए परिवर्तन। अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा के लिए मौके की तलाश में थी। मुगल सत्ता के पतन ने इनकी यह महत्वकांक्षी पूरी की। मुगल सत्ता के पतन ने कई क्षेत्रीय शक्तियों को जन्म दिया। आक्रामक ब्रिटिश नीतियों ने आर्थिक स्थिति को प्रभावित किया। जिससे कृषि उत्पादन में भी बदलाव आया। साथ ही साथ इसने वाणिज्यिक गतिविधियों को भी प्रभावित किया। इस प्रकार 18वीं शताब्दी अंधकार युग था या नहीं इसके लिए हमें इस समय काल के तीन प्रमुख बिंदुओं पर प्रकाश डालना होगा। प्रथम मुगल साम्राज्य का पतन, दूसरा क्षेत्रीय शक्तियों का उदय तथा तीसरा अंग्रेजी हुकूमत का विस्तार।  मुगल साम्राज्य का पतन:-  मुगल साम्राज्य की एकता तथा सदृढ़ता औरंगजेब के शासनकाल में विखंडित होने लगी थी। 1707 ई• में औरंगजेब की मृत्यु के बाद मुगल सत्ता कमजोर हो गई और...