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जापानी साम्राज्यवाद (1894 से 1945) || कोरिया और मंचूरिया

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                                                        जापानी साम्राज्यवाद (1894 से 1945) कोरिया और मंचूरिया मेजी काल की सबसे बड़ी पहचान राष्ट्रवाद थी। 19वीं सदी के उत्तरार्ध में जापान ने आधुनिकीकरण की शुरुआत की। यह माना गया कि जापान को बचे रहने के लिए आधुनिक सेना और मज़बूत औद्योगिक आधार ज़रूरी हैं। तोकुगावा काल में जापान दुनिया से काफ़ी कटा हुआ था। दूसरे देशों के साथ उसके संबंधों का रूप सबसे पहले पश्चिमी साम्राज्यवाद के संदर्भ से तय हुआ, जिसने संकट की भावना पैदा की। दरअसल विद्वान ई. एच. नॉर्मन आधुनिक जापानी राष्ट्रवाद को 'प्रतिक्रियात्मक राष्ट्रवाद' मानते हैं। यह राष्ट्र की चेतना और आधुनिक राज्य बनाने की तुरंत ज़रूरत का एहसास था, जो जापान में पश्चिम के सैन्य कब्ज़े या सांस्कृतिक उपनिवेशीकरण के डर से पैदा हुआ। इस तरह साम्राज्यवाद एक नए अंतरराष्ट्रीय माहौल की देन था। जापानी विस्तार एशियाई महाद्वीप पर केंद्रित रहा और खास तौर पर चीन और कोरिया के विर...

नायक राज्यों का उदय

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नायक राज्यों का उदय पंद्रहवी तथा सोलहवीं शताब्दी में विजयनगर शासकों, कृष्णदेवराय (1509 -29) तथा अच्यूतदेवराय (1529 - 42) के शासनकाल में बड़ी संख्या में नायकों का उदय हुआ। विजयनगर के राजाओं द्वारा इन नायकों को भू-क्षेत्र आबंटित किये गए थे, जिसके बदले में इन नायकों को सैनिक टुकड़ी रखनी होती थी तथा राज्य की ओर से करों की वसूली करनी पड़ती थी। ऐसे भू-अनुदानों ने ही स्वतंत्र राजनितिक व्यवस्थाओं का आधार तैयार किया, जिन्होंने विजयनगर शासन के दौरान राज्यों का दर्जा हासिल कर लिया। इनमें से कुछ शक्तिशाली नायक राजव्यवस्थायें इक्केरी तथा ओड्यार उत्तरी दक्षिण कर्नाटक क्षेत्र में, सेंजी, तंजावुर तथा मदुरै के नायक तमिल क्षेत्र में स्थापित थे। इन राज्यों ने शक्तिशाली और स्वतंत्र होने की बावजूद विजयनगर शासको के प्रति स्वामिभक्ति दर्शाकर अपनी निष्ठा का दावा किया। नायक राजव्यवस्थाऐं अठाहरवीं शताब्दी में 1730 के दशक तक अस्तित्व में बनी रही जब प्रमुख नायक राज्यों में से अंतिम, मदुरै का पतन हुआ।   नायक राज्य मूल रूप से तेलगु थे। उन्हें वडूगा या उत्तरी प्रदेश के निवासी कहा जाता था। नायक राजव्यवस...