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जापानी साम्राज्यवाद (1894 से 1945) || कोरिया और मंचूरिया

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                                                        जापानी साम्राज्यवाद (1894 से 1945) कोरिया और मंचूरिया मेजी काल की सबसे बड़ी पहचान राष्ट्रवाद थी। 19वीं सदी के उत्तरार्ध में जापान ने आधुनिकीकरण की शुरुआत की। यह माना गया कि जापान को बचे रहने के लिए आधुनिक सेना और मज़बूत औद्योगिक आधार ज़रूरी हैं। तोकुगावा काल में जापान दुनिया से काफ़ी कटा हुआ था। दूसरे देशों के साथ उसके संबंधों का रूप सबसे पहले पश्चिमी साम्राज्यवाद के संदर्भ से तय हुआ, जिसने संकट की भावना पैदा की। दरअसल विद्वान ई. एच. नॉर्मन आधुनिक जापानी राष्ट्रवाद को 'प्रतिक्रियात्मक राष्ट्रवाद' मानते हैं। यह राष्ट्र की चेतना और आधुनिक राज्य बनाने की तुरंत ज़रूरत का एहसास था, जो जापान में पश्चिम के सैन्य कब्ज़े या सांस्कृतिक उपनिवेशीकरण के डर से पैदा हुआ। इस तरह साम्राज्यवाद एक नए अंतरराष्ट्रीय माहौल की देन था। जापानी विस्तार एशियाई महाद्वीप पर केंद्रित रहा और खास तौर पर चीन और कोरिया के विर...

शाहजहांनाबाद

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शाहजहांनाबाद शाहजहांनाबाद मुगल साम्राज्य की राजधानी थी। जिसे 1639 में शाहजहां द्वारा बसाया गया। शाहजहां ने 1639 में अपनी राजधानी शाहजहानाबाद स्थानांतरित करने का फैसला किया, अंत: वह 1648 में यहां आकर बसा। यह शहर आज पुरानी दिल्ली के नाम से जाना जाता है। यह शहर प्राचीन काल से ही राजाओं और सुल्तानों के शासन का केंद्र रहा है। यह क्षेत्र केंद्र में होने के साथ-साथ, चारों ओर से सुरक्षित तथा व्यावसायिक रूप से महत्वपूर्ण था। यहां धार्मिक संतों का भी निवास था, जिसे मुख्य रूप से 22 ख्वाजा की चौखट (22 संतो का निवास) के नाम से जाना जाता है। शाहजहानाबाद की वास्तुकला में यमुना किनारे किला-ए-मुबारक (लाल-किला), जामा मस्जिद तथा प्रमुख बाजार चांदनी चौक शहर में शामिल थे। शाहजहानाबाद की नगर योजना को मीर उस्ताद अहमद और उस्ताद लाहौरी ने तैयार किया था। कुछ इतिहासकारों का मानना है कि जनसंख्या अधिक होने के कारण शाहजहां ने राजधानी आगरा से दिल्ली स्थानांतरित की। वहीं दूसरी ओर डॉ.‌ कन्हैयालाल श्रीवास्तव एवं झारखंडे चौबे कहते हैं कि मुगल सम्राट शाहजहां की अभिलाषा मध्ययुगीन इतिहास में एक नवीन अध्याय को जोड़ना था। इस...