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जापानी साम्राज्यवाद (1894 से 1945) || कोरिया और मंचूरिया

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                                                        जापानी साम्राज्यवाद (1894 से 1945) कोरिया और मंचूरिया मेजी काल की सबसे बड़ी पहचान राष्ट्रवाद थी। 19वीं सदी के उत्तरार्ध में जापान ने आधुनिकीकरण की शुरुआत की। यह माना गया कि जापान को बचे रहने के लिए आधुनिक सेना और मज़बूत औद्योगिक आधार ज़रूरी हैं। तोकुगावा काल में जापान दुनिया से काफ़ी कटा हुआ था। दूसरे देशों के साथ उसके संबंधों का रूप सबसे पहले पश्चिमी साम्राज्यवाद के संदर्भ से तय हुआ, जिसने संकट की भावना पैदा की। दरअसल विद्वान ई. एच. नॉर्मन आधुनिक जापानी राष्ट्रवाद को 'प्रतिक्रियात्मक राष्ट्रवाद' मानते हैं। यह राष्ट्र की चेतना और आधुनिक राज्य बनाने की तुरंत ज़रूरत का एहसास था, जो जापान में पश्चिम के सैन्य कब्ज़े या सांस्कृतिक उपनिवेशीकरण के डर से पैदा हुआ। इस तरह साम्राज्यवाद एक नए अंतरराष्ट्रीय माहौल की देन था। जापानी विस्तार एशियाई महाद्वीप पर केंद्रित रहा और खास तौर पर चीन और कोरिया के विर...

प्रगतिवादी आंदोलन का उद्देश्य

प्रश्न:- प्रगतिवादी आंदोलन के उद्देश्यों का वर्णन कीजिए। परिचय:- प्रगतिवादी आंदोलन थियोडर रुजवेल्ट के राष्ट्रपति काल में आरंभ हुआ। इसने अनेक अमेरिकियों को प्रभावित किया। नेताओं ने राज्यों और नगरों की राजनीति में इस विचारधारा का प्रतिपादन किया। इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य जनता को प्रशासन में अधिक से अधिक भाग देना तथा सरकार को लोककल्याणकारी होने के लिए अधिक शक्तिशाली, दक्ष और क्रियाशील करना था। प्रगतिवादियो ने सुधार कार्यक्रम को अपनाया। इसमें देश के सभी भागों के स्त्री-पुरुष विशेषकर उत्तर-पूर्व और मध्य पश्चिमी के लोग शामिल थे। इस आंदोलन की शुरुआत नगरों से हुई। यहां सामाजिक न्याय और प्रशासनिक सुधार पर ध्यान दिया गया। प्रगतिवादी नेताओं में कॉलेज में शिक्षा प्राप्त पेशेवर लोग, छोटे छोटे व्यवसाई तथा देसी प्रोटेस्टेंट शामिल थे। सुधारको ने दो बुराइयों के विरुद्ध संघर्ष किया। वह भ्रष्टाचार की वजह से दुखी थे। सरकार धनिक वर्ग को सभी स्तरों पर विशेष सुविधाएं प्रदान कर रही थी। वे इन लोगों तथा नेताओं की सत्ता का अंत करना और जनता को सच्चे अर्थों में स्वतंत्रता दिलाना चाहते थे। उनकी यह भी इच्छा थी कि ...