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काकतीय अभिलेख

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  काकतीय अभिलेख  काकतीय वंश ने 12वीं से 14वीं शताब्दी तक पूर्वी दक्कन क्षेत्र तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु और ओडिशा के कुछ हिस्सों पर शासन किया। इस साम्राज्य की जानकारी का प्रमुख स्रोत लिखित अभिलेख (Inscriptions) है। यह अभिलेख, पत्थर, तांबे की प्लेटों और मंदिर की दीवारों पर उकेरे गए है जो काकतीयों साम्राज्य की वंशावली, राजनीतिक गतिविधियों, प्रशासन, अर्थव्यवस्था, समाज, धर्म और सांस्कृतिक योगदान के बारे में जानकारी प्रदान करते हैं। काकतीय अभिलेख मुख्य रूप से तेलुगु और संस्कृत में लिखे गए। उल्लेखनीय अभिलेखों में बय्यारम टैंक शिलालेख, मोटुपल्ली शिलालेख, मंगल्लु शिलालेख और हनुमकोंडा शिलालेख शामिल हैं। विद्वान पी.वी. परब्रह्म शास्त्री के अनुसार काकतीय अभिलेख तेलुगु भाषा और साहित्य के विकास का "स्वर्णयुग" दिखाते हैं।  वंशावली की जानकारी शिलालेख काकतीय शासकों की वंशावली और कालक्रम को उजागर करते है। गणपति देवा (1199–1262) के शासनकाल में जारी बय्यारम टैंक शिलालेख , एक विस्तृत वंशावली सूची प्रदान करता है। यह शिलालेख वेन्ना, बीटा I, प्रोल I, और रुद्रदेवा जैसे पूर...

औपनिवेशिक भारत में विवाह और प्रेम की विविध अभिव्यक्तियां

औपनिवेशिक भारत में विवाह और प्रेम की विविध अभिव्यक्तियां  औपनिवेशिक भारत में विवाह और प्रेम की विभिन्न अभिव्यक्तियाँ थीं, जो अलग-अलग सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं से प्रभावित थीं। धनी और शक्तिशाली लोगों के बीच बहुविवाह का प्रचलन था। मुस्लिम पुरुषों को इस्लामी कानून के तहत चार पत्नियाँ रखने की अनुमति थी। उपपत्नी प्रथा भी आम थी, जहाँ एक पुरुष की एक रखैल होती थी, जिसकी सामाजिक स्थिति या कानूनी अधिकार पत्नी के समान नहीं होता था। विद्वान चारु गुप्ता ने बताया है कि विषमलैंगिक संबंध माता-पिता द्वारा स्वीकृत था और समान-जाति में विवाह कारना एक आदर्श माना जाता था। इसके अलावा कोई भी अनैतिक कार्य या संबंध भारतीय सामाजिक परंपरा का उल्लंघन माना जाता था। प्रेम की अभिव्यक्ति के लिए उपहारों का आदान-प्रदान, पत्र और कविताएँ लिखना और गीत गाना जैसी विभिन्न सांस्कृतिक प्रथाएँ थीं। हालाँकि, ये अभिव्यक्तियाँ सामाजिक और सांस्कृतिक संदर्भों तक ही सीमित थीं और सार्वभौमिक रूप से स्वीकार नहीं की जाती थीं। सार्वजनिक रूप से मिलना और शारीरिक स्नेह की अभिव्यक्ति को अनुचित और वर्जित माना जाता था। औपनिवेशिक भारत मे...