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काकतीय अभिलेख

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  काकतीय अभिलेख  काकतीय वंश ने 12वीं से 14वीं शताब्दी तक पूर्वी दक्कन क्षेत्र तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु और ओडिशा के कुछ हिस्सों पर शासन किया। इस साम्राज्य की जानकारी का प्रमुख स्रोत लिखित अभिलेख (Inscriptions) है। यह अभिलेख, पत्थर, तांबे की प्लेटों और मंदिर की दीवारों पर उकेरे गए है जो काकतीयों साम्राज्य की वंशावली, राजनीतिक गतिविधियों, प्रशासन, अर्थव्यवस्था, समाज, धर्म और सांस्कृतिक योगदान के बारे में जानकारी प्रदान करते हैं। काकतीय अभिलेख मुख्य रूप से तेलुगु और संस्कृत में लिखे गए। उल्लेखनीय अभिलेखों में बय्यारम टैंक शिलालेख, मोटुपल्ली शिलालेख, मंगल्लु शिलालेख और हनुमकोंडा शिलालेख शामिल हैं। विद्वान पी.वी. परब्रह्म शास्त्री के अनुसार काकतीय अभिलेख तेलुगु भाषा और साहित्य के विकास का "स्वर्णयुग" दिखाते हैं।  वंशावली की जानकारी शिलालेख काकतीय शासकों की वंशावली और कालक्रम को उजागर करते है। गणपति देवा (1199–1262) के शासनकाल में जारी बय्यारम टैंक शिलालेख , एक विस्तृत वंशावली सूची प्रदान करता है। यह शिलालेख वेन्ना, बीटा I, प्रोल I, और रुद्रदेवा जैसे पूर...

1917 की रूस की क्रांति का विस्तार से वर्णन

प्रश्न:- 1917 की रूस की क्रांति का विस्तार से वर्णन कीजिए। परिचय:- 1917 की रूसी क्रांति बीसवीं सदी की उन महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक है जिन्होंने विश्व को किसी न किसी रूप में प्रभावित किया। इसमें सिर्फ राजनीतिक में ही नहीं सामाजिक- सांस्कृतिक और वैचारिक रूप में भी बदलाव की प्रक्रिया शुरू की।1789 की फ्रांसीसी राज्य क्रांति के बाद यह एक महत्वपूर्ण घटना थी। 1917 में रूस में दो क्रांतियां हुई। कुछ इतिहासकारों का विचार है कि एक ही क्रांति दो चरणों में पूर्ण हुई। फरवरी-मार्च में हुई राजनीतिक क्रांति के द्वारा रूस में जारशाही का अंत हुआ और अक्टूबर-नवंबर में हुई सामाजिक क्रांति से सर्वहारा गणतंत्र की स्थापना हुई। 1917 की फरवरी क्रांति से पूर्व 1905 में भी रूस में क्रांति हुई जिसे इतिहासकार अक्टूबर की क्रांति का "ड्रेस रिहर्सल" मानते हैं। 1905 की क्रांति तक रूस में राजनीतिक दल और मजदूर संघ जैसे संस्थाओं का अभाव था। रूस में क्रांति से पूर्व उच्च तथा निम्न वर्ग के बीच अत्यधिक सामाजिक और आर्थिक भिन्नता थी। राज्य के महत्वपूर्ण पदों पर कुलीनों तथा पूंजीपतियों का ही अधिकार था। किसानों की स्...