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जापानी साम्राज्यवाद (1894 से 1945) || कोरिया और मंचूरिया

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                                                        जापानी साम्राज्यवाद (1894 से 1945) कोरिया और मंचूरिया मेजी काल की सबसे बड़ी पहचान राष्ट्रवाद थी। 19वीं सदी के उत्तरार्ध में जापान ने आधुनिकीकरण की शुरुआत की। यह माना गया कि जापान को बचे रहने के लिए आधुनिक सेना और मज़बूत औद्योगिक आधार ज़रूरी हैं। तोकुगावा काल में जापान दुनिया से काफ़ी कटा हुआ था। दूसरे देशों के साथ उसके संबंधों का रूप सबसे पहले पश्चिमी साम्राज्यवाद के संदर्भ से तय हुआ, जिसने संकट की भावना पैदा की। दरअसल विद्वान ई. एच. नॉर्मन आधुनिक जापानी राष्ट्रवाद को 'प्रतिक्रियात्मक राष्ट्रवाद' मानते हैं। यह राष्ट्र की चेतना और आधुनिक राज्य बनाने की तुरंत ज़रूरत का एहसास था, जो जापान में पश्चिम के सैन्य कब्ज़े या सांस्कृतिक उपनिवेशीकरण के डर से पैदा हुआ। इस तरह साम्राज्यवाद एक नए अंतरराष्ट्रीय माहौल की देन था। जापानी विस्तार एशियाई महाद्वीप पर केंद्रित रहा और खास तौर पर चीन और कोरिया के विर...

फासीवादी इटली की आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक विशेषताएं

प्रश्न:- फासीवादी इटली की आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक विशेषताओं का वर्णन कीजिए। परिचय:- 1922 में सत्ता में आने वाला बेनिटो मुसोलिनी पहला तानाशाह था। 1925 तक तानाशाही लागू करने वाले फासीवादी पार्टियां 40 से भी अधिक राष्ट्रों में फैल चुकी थी। महायुद्ध के कारण इटली को जन-धन की अपार हानि हुई थी, जिसकी वजह से उसके ऊपर कर्ज का भारी बोझ लाद दिया गया। इटली ने युद्ध में विशाल धनराशि लगाई। वह युद्ध में लाभ अर्जित करने के लिए शामिल हुआ, लेकिन उसे घोर निराशा मिली। आर्थिक संकट के कारण इटली में अराजकता फैलने लगी। वहीं दूसरी तरफ वहां की सरकार हाथ पर हाथ धरे चुपचाप बैठी हुई थी। इसी परिस्थितियों में इटली में एक ऐसी पार्टी का जन्म हुआ, जिसने इटली के शासन के स्वरूप को बदल दिया। यह पार्टी "फासिस्ट" कहलाती थी और इसके समर्थक फासीवादी। फासीवादी जिस भी बात अथवा व्यवस्था के विरुद्ध होते थे वह उसकी भर्त्सना कर अपनी पहचान करा देते थे। वह स्वयं को एक नई सामाजिक तथा राजनीतिक व्यवस्था के निर्माता के रूप में देखा करते थे। इनका आधार राष्ट्र की सेवा हुआ करता था। यह एक अधिक शक्तिशाली राष्ट्र चाहते थे, जो विजय...