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जापानी साम्राज्यवाद (1894 से 1945) || कोरिया और मंचूरिया

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                                                        जापानी साम्राज्यवाद (1894 से 1945) कोरिया और मंचूरिया मेजी काल की सबसे बड़ी पहचान राष्ट्रवाद थी। 19वीं सदी के उत्तरार्ध में जापान ने आधुनिकीकरण की शुरुआत की। यह माना गया कि जापान को बचे रहने के लिए आधुनिक सेना और मज़बूत औद्योगिक आधार ज़रूरी हैं। तोकुगावा काल में जापान दुनिया से काफ़ी कटा हुआ था। दूसरे देशों के साथ उसके संबंधों का रूप सबसे पहले पश्चिमी साम्राज्यवाद के संदर्भ से तय हुआ, जिसने संकट की भावना पैदा की। दरअसल विद्वान ई. एच. नॉर्मन आधुनिक जापानी राष्ट्रवाद को 'प्रतिक्रियात्मक राष्ट्रवाद' मानते हैं। यह राष्ट्र की चेतना और आधुनिक राज्य बनाने की तुरंत ज़रूरत का एहसास था, जो जापान में पश्चिम के सैन्य कब्ज़े या सांस्कृतिक उपनिवेशीकरण के डर से पैदा हुआ। इस तरह साम्राज्यवाद एक नए अंतरराष्ट्रीय माहौल की देन था। जापानी विस्तार एशियाई महाद्वीप पर केंद्रित रहा और खास तौर पर चीन और कोरिया के विर...

नवपाषाण काल (Social Formation Ancient World)

नवपाषाण काल पुरातात्विक शब्दावली में पुरापाषण और मध्यपाषाण युग के बाद नवपाषाण युग का आगमन होता है। यह युग लगभग 12,000 से 2,000 ई•पू• तक फैला है। पौधों को उगाया जाना और पशुओं को पाला जाना तथा खेती पर लगभग पूर्ण निर्भरता, जनसंख्या में वृद्धि, बस्तियों के आकार में वृद्धि, मिट्टी के बर्तनों का उपयोग और कपड़े की बुनाई, व्यापक पैमाने पर होने वाला सामाजिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान नवपाषाण युग की कुछ प्रमुख विशेषताएं हैं। इस युग में कृषि की शुरूआत के क्रांतिकारी महत्व को उजागर करने के लिए विद्वान Vere Gordon Childe ने अपनी पुस्तक Men makes Himself (1936) में ' नवपाषाण क्रांति’ शब्द का इस्तेमाल किया था। उनके अनुसार मनुष्य ने आरंभिक होलोसिन युग की विकट जलवायु संकट को पार करते हुए इस युग की प्रकृति को अपना सहचर बनाया। चाइल्ड के अनुसार आग जलाने की कला सीखने के बाद भोजन उत्पादन मानव इतिहास की सबसे बड़ी आर्थिक क्रांति थी। अब उनके पास भंडार में रखने को अधिशेष भी था जिसे वे अपने मनमर्जी से इस्तेमाल कर सकते थे। इसका इस्तेमाल संकट के समय हो सकता था, यह बड़ी आबादी का पालन पोषण कर सकता था और इसका वि...