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पैट्रीशियन तथा प्लीबियन का संघर्ष

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  पैट्रीशियन तथा प्लीबियन का संघर्ष  “रोम में 510 ईसापूर्व में राजशाही का अंत हुआ तथा गणतंत्र की शुरुआत हुई। जिसमें राजनितिक सत्ता कुलीनों के हांथो में रही तथा उन्होंने इससे अकूत धन कमाया। जिसके चलते आमिर और गरीब के बीच की खाई बढ़ती गयी तथा निम्न वर्ग इनसे नाराज रहने लगा। इस प्रकार प्राचीन रोमन समाज दो वर्गो में विभाजित था - पैट्रिशियन और प्लीबियन । पैट्रिशियन में कुलीन वर्ग शामिल थे जो आर्थिक, राजनितिक और सामाजिक रूप से संपन्न थे। प्लीबियन में आम लोग, किसान तथा मजदुर शामिल थे। इनके बीच होने वाले संघर्ष को "श्रेणियों का टकराव" तथा "कॉन्फ्लिक्ट ऑफ द ऑर्डर्स" के नाम से जाना जाता है जो लगभग 494 ई• पू• से 287 ई• पू• तक चला। रोमन इतिहासकार टाइटस लिवियस के अनुसार, प्लीबियन और पैट्रीशियन के बीच संघर्ष एक सामाजिक और आर्थिक संघर्ष था, जिसमें प्लीबियन ने अपने अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी। विद्वान कार्ल मार्क्स के अनुसार यह इतिहास का सबसे पहला 'वर्ग-संघर्ष' है जिसने बाद के सामाजिक बदलावों की नींव रखी। वैवाहिक प्रतिबंध - 445 ई• पू• के बाद पैट्रिशियन और प्लीबियन के ...

फ्रांसीसी क्रांति में महिलाओं की भूमिका

  फ्रांसीसी क्रांति में महिलाओं की भूमिका परिचय:- 1789 से लेकर 1795 तक की अवधि में क्रांतिकारी गतिविधियों में समाज की भिन्न वर्गों की महिलाओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा। इन महिलाओं के योगदान के बिना क्रांति और उसकी उपलब्धियों की कल्पना भी नहीं की जा सकती। क्रांति में महिलाओं की भूमिका सक्रिय और महत्वपूर्ण रही। पुरुष के साथ कंधे से कंधा मिलाकर महिलाओं ने एक ऐसे समाज की स्थापना की जो स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के आदर्श पर टिका था। किंतु अपने अधिकारों को प्राप्त करने के लिए उन्हें पुरुषों के विरुद्ध संघर्ष भी करना पड़ा। उपर्युक्त बातों से हटकर महिलाओं के विषय में सबसे प्रमुख बात यह है कि 1970 तक फ्रांसीसी क्रांति के इतिहास लेखन में महिलाओं को कोई स्थान प्राप्त नहीं था। लंबे समय तक महिलाएं इतिहास में छुपी रहे और उन पर कोई शोध कार्य नहीं हुआ। 1970 के दशक में इस कमी को दूर करने का प्रयास किया गया। 1970 में एक अमेरिकी जेन आबेर द्वारा पहला ऐसा लेख लिखा गया जो क्रांति की महिलाओं से संबंधित था। इस लेख के बाद फ्रांसीसी क्रांति में महिलाओं की भूमिका पर शोध कार्य आरंभ हुए।  इस लेख के बाद ...