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काकतीय अभिलेख

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  काकतीय अभिलेख  काकतीय वंश ने 12वीं से 14वीं शताब्दी तक पूर्वी दक्कन क्षेत्र तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु और ओडिशा के कुछ हिस्सों पर शासन किया। इस साम्राज्य की जानकारी का प्रमुख स्रोत लिखित अभिलेख (Inscriptions) है। यह अभिलेख, पत्थर, तांबे की प्लेटों और मंदिर की दीवारों पर उकेरे गए है जो काकतीयों साम्राज्य की वंशावली, राजनीतिक गतिविधियों, प्रशासन, अर्थव्यवस्था, समाज, धर्म और सांस्कृतिक योगदान के बारे में जानकारी प्रदान करते हैं। काकतीय अभिलेख मुख्य रूप से तेलुगु और संस्कृत में लिखे गए। उल्लेखनीय अभिलेखों में बय्यारम टैंक शिलालेख, मोटुपल्ली शिलालेख, मंगल्लु शिलालेख और हनुमकोंडा शिलालेख शामिल हैं। विद्वान पी.वी. परब्रह्म शास्त्री के अनुसार काकतीय अभिलेख तेलुगु भाषा और साहित्य के विकास का "स्वर्णयुग" दिखाते हैं।  वंशावली की जानकारी शिलालेख काकतीय शासकों की वंशावली और कालक्रम को उजागर करते है। गणपति देवा (1199–1262) के शासनकाल में जारी बय्यारम टैंक शिलालेख , एक विस्तृत वंशावली सूची प्रदान करता है। यह शिलालेख वेन्ना, बीटा I, प्रोल I, और रुद्रदेवा जैसे पूर...

फासीवादी इटली की आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक विशेषताएं

प्रश्न:- फासीवादी इटली की आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक विशेषताओं का वर्णन कीजिए। परिचय:- 1922 में सत्ता में आने वाला बेनिटो मुसोलिनी पहला तानाशाह था। 1925 तक तानाशाही लागू करने वाले फासीवादी पार्टियां 40 से भी अधिक राष्ट्रों में फैल चुकी थी। महायुद्ध के कारण इटली को जन-धन की अपार हानि हुई थी, जिसकी वजह से उसके ऊपर कर्ज का भारी बोझ लाद दिया गया। इटली ने युद्ध में विशाल धनराशि लगाई। वह युद्ध में लाभ अर्जित करने के लिए शामिल हुआ, लेकिन उसे घोर निराशा मिली। आर्थिक संकट के कारण इटली में अराजकता फैलने लगी। वहीं दूसरी तरफ वहां की सरकार हाथ पर हाथ धरे चुपचाप बैठी हुई थी। इसी परिस्थितियों में इटली में एक ऐसी पार्टी का जन्म हुआ, जिसने इटली के शासन के स्वरूप को बदल दिया। यह पार्टी "फासिस्ट" कहलाती थी और इसके समर्थक फासीवादी। फासीवादी जिस भी बात अथवा व्यवस्था के विरुद्ध होते थे वह उसकी भर्त्सना कर अपनी पहचान करा देते थे। वह स्वयं को एक नई सामाजिक तथा राजनीतिक व्यवस्था के निर्माता के रूप में देखा करते थे। इनका आधार राष्ट्र की सेवा हुआ करता था। यह एक अधिक शक्तिशाली राष्ट्र चाहते थे, जो विजय...