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जापानी साम्राज्यवाद (1894 से 1945) || कोरिया और मंचूरिया

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                                                        जापानी साम्राज्यवाद (1894 से 1945) कोरिया और मंचूरिया मेजी काल की सबसे बड़ी पहचान राष्ट्रवाद थी। 19वीं सदी के उत्तरार्ध में जापान ने आधुनिकीकरण की शुरुआत की। यह माना गया कि जापान को बचे रहने के लिए आधुनिक सेना और मज़बूत औद्योगिक आधार ज़रूरी हैं। तोकुगावा काल में जापान दुनिया से काफ़ी कटा हुआ था। दूसरे देशों के साथ उसके संबंधों का रूप सबसे पहले पश्चिमी साम्राज्यवाद के संदर्भ से तय हुआ, जिसने संकट की भावना पैदा की। दरअसल विद्वान ई. एच. नॉर्मन आधुनिक जापानी राष्ट्रवाद को 'प्रतिक्रियात्मक राष्ट्रवाद' मानते हैं। यह राष्ट्र की चेतना और आधुनिक राज्य बनाने की तुरंत ज़रूरत का एहसास था, जो जापान में पश्चिम के सैन्य कब्ज़े या सांस्कृतिक उपनिवेशीकरण के डर से पैदा हुआ। इस तरह साम्राज्यवाद एक नए अंतरराष्ट्रीय माहौल की देन था। जापानी विस्तार एशियाई महाद्वीप पर केंद्रित रहा और खास तौर पर चीन और कोरिया के विर...

विजयनगर साम्राज्य

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विजयनगर साम्राज्य विजयनगर साम्राज्य एक शक्तिशाली साम्राज्य था, जिसने दक्षिण भारत पर एक अमिट छाप छोड़ी। इसकी स्थापना 1336 ई. में दो भाइयों, हरिहर और बुक्का ने की थी। विजयनगर साम्राज्य ने दक्षिण भारत में दिल्ली सल्तनत के विस्तार का विरोध करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह साम्राज्य अपनी प्रभावशाली सैन्य शक्ति, प्रशासनिक प्रणाली और समृद्ध कला और वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध था। विजयनगर व्यापार का केंद्र था, जो दुनिया भर से व्यापारियों और यात्रियों को आकर्षित करता था। साम्राज्य के शासक साहित्य, संगीत और कला के संरक्षक थे, जिससे सांस्कृतिक विकास का स्वर्ण युग शुरू हुआ। इस साम्राज्य की प्रभावशाली नीतियों ने दक्षिण भारत के राजनीतिक, सांस्कृतिक और आर्थिक परिदृश्य को आकार दिया। केन्द्रीय व्यवस्था - विजयनगर साम्राज्य में राजा प्रशासन का प्रमुख था तथा सर्वोच्च सत्ता का स्वामी था। उससे अपेक्षा की जाती थी कि वह प्रजा के हित का ध्यान रखे। राजा को चुनने में राज्य के मंत्रियों और नायकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती थी, जैसे कि वीर नरसिम्हा की मत्यु पर कृष्णराय को राजा बनाने में सालुवा तिम्ना...