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जापानी साम्राज्यवाद (1894 से 1945) || कोरिया और मंचूरिया

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                                                        जापानी साम्राज्यवाद (1894 से 1945) कोरिया और मंचूरिया मेजी काल की सबसे बड़ी पहचान राष्ट्रवाद थी। 19वीं सदी के उत्तरार्ध में जापान ने आधुनिकीकरण की शुरुआत की। यह माना गया कि जापान को बचे रहने के लिए आधुनिक सेना और मज़बूत औद्योगिक आधार ज़रूरी हैं। तोकुगावा काल में जापान दुनिया से काफ़ी कटा हुआ था। दूसरे देशों के साथ उसके संबंधों का रूप सबसे पहले पश्चिमी साम्राज्यवाद के संदर्भ से तय हुआ, जिसने संकट की भावना पैदा की। दरअसल विद्वान ई. एच. नॉर्मन आधुनिक जापानी राष्ट्रवाद को 'प्रतिक्रियात्मक राष्ट्रवाद' मानते हैं। यह राष्ट्र की चेतना और आधुनिक राज्य बनाने की तुरंत ज़रूरत का एहसास था, जो जापान में पश्चिम के सैन्य कब्ज़े या सांस्कृतिक उपनिवेशीकरण के डर से पैदा हुआ। इस तरह साम्राज्यवाद एक नए अंतरराष्ट्रीय माहौल की देन था। जापानी विस्तार एशियाई महाद्वीप पर केंद्रित रहा और खास तौर पर चीन और कोरिया के विर...

यूनानी इतिहासलेखन परंपरा

यूनानी इतिहासलेखन परंपरा परिचय:- इतिहासलेखन परंपरा का आरंभ यूनानीयों द्वारा किया गया। उन्होंने ही सबसे पहले वास्तविक इतिहासलिखने की कला सीखी, उसके उद्देश्यों, इसके कार्यों और इसके नियमों को बतलाया। यूनान के हीरोडोटस (480-430 ई•पू) को इतिहास का जनक कहा जाता है। इतिहासलेखन के क्षेत्र में यूनानीयों का योगदान सराहनीय है। प्राचीन यूनान में अतीत की सुरक्षा के प्रयास साहित्यिक कृतियों में दृष्टिगोचर होते है। यूनान के प्रारंभिक लेखकों का ध्यान समकालीन लेखन पर ही था। परंतु समय बीतने के साथ-साथ यूनानी इतिहासलेखन परिपक्व होता गया। प्राचीन यूनानी अपने परिवार के पूर्वजों को आस्था और सम्मान प्रदान करते थे। अपने पूर्वजों की स्मृति और वंशावली को सहेजने के उद्देश्य से उन्होंने अपनी कृतियों की रचना की। इनकी कृतियों में भूगोल, समाजशास्त्र और मानवशास्त्र संबंधी जानकारी भी समाहित है। किंतु विद्वान शाटवेल ने यूनानी कृतियों की आलोचना की है और कहा है कि इन्होंने इतिहास का मार्ग अवरुद्ध कर दिया तथा इनमें इतनी अधिक काल्पनिक सामग्रियां है कि इनमें यथार्थ, कल्पना और लोकरुचि का पता लगाना बहुत कठिन है। यूनान में इत...