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जापानी साम्राज्यवाद (1894 से 1945) || कोरिया और मंचूरिया

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                                                        जापानी साम्राज्यवाद (1894 से 1945) कोरिया और मंचूरिया मेजी काल की सबसे बड़ी पहचान राष्ट्रवाद थी। 19वीं सदी के उत्तरार्ध में जापान ने आधुनिकीकरण की शुरुआत की। यह माना गया कि जापान को बचे रहने के लिए आधुनिक सेना और मज़बूत औद्योगिक आधार ज़रूरी हैं। तोकुगावा काल में जापान दुनिया से काफ़ी कटा हुआ था। दूसरे देशों के साथ उसके संबंधों का रूप सबसे पहले पश्चिमी साम्राज्यवाद के संदर्भ से तय हुआ, जिसने संकट की भावना पैदा की। दरअसल विद्वान ई. एच. नॉर्मन आधुनिक जापानी राष्ट्रवाद को 'प्रतिक्रियात्मक राष्ट्रवाद' मानते हैं। यह राष्ट्र की चेतना और आधुनिक राज्य बनाने की तुरंत ज़रूरत का एहसास था, जो जापान में पश्चिम के सैन्य कब्ज़े या सांस्कृतिक उपनिवेशीकरण के डर से पैदा हुआ। इस तरह साम्राज्यवाद एक नए अंतरराष्ट्रीय माहौल की देन था। जापानी विस्तार एशियाई महाद्वीप पर केंद्रित रहा और खास तौर पर चीन और कोरिया के विर...

भारतीय महापाषाण काल

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भारतीय महापाषाण काल ' महापाषाण' शब्द ग्रीक ' मेगास ' अर्थात बड़ा और ' लिथोस ' अर्थात पत्थर से जुड़कर बना है। महापाषाण के अंतर्गत बहुत प्रकार के स्मारक सम्मिलित हैं किन्तु इन सबमें एक समानता यह हैं कि सभी बड़े और अच्छे प्रकार से तराशे गए पत्थर के टुकड़ों से बने हैं। यूरोप, एशिया और अफ्रीका, दक्षिणी तथा मध्य अमेरिका के विभिन्न भागों में महापाषाणों की प्राप्ति होती रही है। भारतीय उपमहाद्वीप में ये विशेषकर दक्षिण भारत में दक्कन, विंध्य और अरावली के क्षेत्र में तथा उत्तर पश्चिमी क्षेत्र में पाए गए हैं। महापाषाणों की संस्कृति को बहुवचन में “महापाषाणीय संस्कृतियों” की संज्ञा दी जाती है न कि एकवचन में " महापाषाण संस्कृति "। महापाषाण संस्कृति एक प्रकार के दफनाने की शैली से जुड़ी हुई संस्कृति है जो विभिन्न स्थानों पर लंबे समय तक प्रचलन में रही। इस प्रकार के दफनाने की प्रथा की शुरुआत नवपाषाण-ताम्रपाषाण काल में ही शुरू हो गयी थी। उदाहरण के लिए, दक्षिण भारत के नवपाषाण ताम्रपाषाण स्थलों में गड्डों अथवा विशाल पात्रों में शवों को दफनाया जाता था। इस युग की पुरातत्त्व स...