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मार्टिन लूथर किंग JR.

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मार्टिन लूथर किंग JR. मार्टिन लूथर किंग का जन्म 15 जनवरी, 1929 को  अटलांटा, जॉर्जिया   में हुआ था। किंग ने  पेंसिल्वेनिया  के स्कूल में तीन साल तक पढ़ाई की। वहाँ उन्होंने अहिंसक विरोध के बारे में सीखा। 15 साल की उम्र में उन्होंने अटलांटा के  मोरहाउस कॉलेज   में दाखिला लिया तथा 1948 में स्नातक की उपाधि प्राप्त की। किंग ने 1955 में मैसाचुसेट्स में  बोस्टन विश्वविद्यालय  से डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की। 1954 में, किंग  मोंटगोमरी , अलबामा  में एक बैपटिस्ट चर्च के पादरी भी बने। कम उम्र में ही उनके माता-पिता ने उन्हें सिखाया कि अश्वेत होने से वे गोरों से अलग नहीं हो जाते, क्योंकि ईश्वर ने सभी मनुष्यों को समान बनाया है। उन्हें बचपन में ही भेदभाव का सामना करना पड़ा था। इसलिए, उनका एक सपना था कि वे एक दिन बड़े होकर इसे रोकेंगे। कॉलेज में दाखिला लेने के बाद उन्हें अपने विचारों को दुनिया के सामने व्यक्त करने का अवसर मिला। मार्टिन लूथर किंग को नागरिक अधिकार आंदोलन के सबसे महत्वपूर्ण अफ्रीकी-अमेरिकी नेताओं में से एक माना जाता है। वह अफ्रीकी-अमेरिकिय...

फ्रांसीसी क्रांति में प्रकाशनों की भुमिका

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फ्रांसीसी क्रांति में प्रकाशनों की भूमिका प्रिंटिंग प्रेस ने क्रांतिकारी विचारों का प्रसार करके और व्यापक आबादी को संचार और सूचना प्रसार का साधन प्रदान करके फ्रांसीसी क्रांति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इससे जनता को लामबंद करने और सामाजिक और राजनीतिक परिवर्तन लाने में मदद मिली। इसने समाचारों, राजनीतिक पैम्फलेटों और क्रांतिकारी घोषणापत्रों के तेजी से प्रसार को बढ़ावा दिया और क्रांति के लिए जनता की राय और समर्थन को प्रेरित करने में मदद की। प्रिंटिंग प्रेस ने क्रांति के विचारधारा को आकार देने में भी भूमिका निभाई, क्योंकि विभिन्न समूहों और गुटों ने इसका इस्तेमाल अपने विचारों और एजंडो को बढ़ावा देने के लिए किया। इतिहासकार लिन हंट  जिन्होंने फ्रांसीसी क्रांति में प्रिंटिंग प्रेस की भूमिका पर विस्तार से लिखा है। अपनी पुस्तक,"फ्रांसीसी क्रांति में राजनीति, संस्कृति और वर्ग" में, कहा है की प्रिंटिंग प्रेस ने राजनीतिक संचार के एक नए रूप की अनुमति दी, जहां लोग बड़े पैमाने पर एक-दूसरे और राज्य के साथ जुड़ सके। संचार के इस नए रूप ने जनमत को आकार देने में मदद की और क्रांति की सफलता में मह...

कन्फूसियसवाद

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कन्फूसियसवाद   प्राचीन काल में चीन के दार्शनिक विचारों ने व्यक्तिगत आवश्यकताओं को पूरा करने बजाय सामाजिक जरूरतों को पूरा किया। इस समय में उत्पन्न हुए अधिकतर विचारक नौकरशाही तथा राजनितिक व्यवस्था की उत्पत्ति थे जो राजनितिक समूह से आते थे। आगे चलकर इन विचारकों ने अपने गुट बना लिए और वे उपदेशक हो गए। धीरे धीरे उनके शिष्यों ने उनकी विचारधाराओं को स्थापित किया। इनमे से ही एक विचारधारा कन्फूसियसवाद थी। जिसका अनुसरण चीन ने कई शताब्दियों तक किया। कन्फूसियसवाद एक पश्चिमी नाम है। चीनियों द्वारा इसे जू शियाओ या " विद्वानों का उपदेश" कहा जाता है। कन्फूसियस कब अस्तित्व में आया इसको लेकर विवाद है। चीनी उसके जन्म का समय 551 ई.पू. मानते है तथा वह 479 ई.पू. तक जीवित रहा। उसने एक छोटे अधिकारी के रूप में कई कार्य किये। जैसे कि उसने गोदाम प्रबंधन, अध्यापन, अपराध के लिए दंड देने वाले तथा सामाजिक कानून व्यवस्था बनाए रखने वाले अधिकारी के रूप में कार्य किया। आगे चलकर उसके यही उपदेश कन्फूसियस सम्प्रदाय में परिवर्तित हो गए। उसको इस सम्प्रदाय का सबसे बड़ा प्रवर्तक माना गया किन्तु अन्य कई उपदेशकों एव...