मार्टिन लूथर किंग JR.

चित्र
मार्टिन लूथर किंग JR. मार्टिन लूथर किंग का जन्म 15 जनवरी, 1929 को  अटलांटा, जॉर्जिया   में हुआ था। किंग ने  पेंसिल्वेनिया  के स्कूल में तीन साल तक पढ़ाई की। वहाँ उन्होंने अहिंसक विरोध के बारे में सीखा। 15 साल की उम्र में उन्होंने अटलांटा के  मोरहाउस कॉलेज   में दाखिला लिया तथा 1948 में स्नातक की उपाधि प्राप्त की। किंग ने 1955 में मैसाचुसेट्स में  बोस्टन विश्वविद्यालय  से डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की। 1954 में, किंग  मोंटगोमरी , अलबामा  में एक बैपटिस्ट चर्च के पादरी भी बने। कम उम्र में ही उनके माता-पिता ने उन्हें सिखाया कि अश्वेत होने से वे गोरों से अलग नहीं हो जाते, क्योंकि ईश्वर ने सभी मनुष्यों को समान बनाया है। उन्हें बचपन में ही भेदभाव का सामना करना पड़ा था। इसलिए, उनका एक सपना था कि वे एक दिन बड़े होकर इसे रोकेंगे। कॉलेज में दाखिला लेने के बाद उन्हें अपने विचारों को दुनिया के सामने व्यक्त करने का अवसर मिला। मार्टिन लूथर किंग को नागरिक अधिकार आंदोलन के सबसे महत्वपूर्ण अफ्रीकी-अमेरिकी नेताओं में से एक माना जाता है। वह अफ्रीकी-अमेरिकिय...

स्पर्टा नगर - राज्य और राजनीतिक संरचना

स्पार्टा का नगर-राज्य में कुछ हद तक और असामान्य सरकारें थी जिसमें राजतंत्र, कुलीनतंत्र और लोकतंत्र का मिश्रण था। इसकी सरकार का चरित्र कुलीनतांत्रिक था। एथेंस के विपरीत स्पार्टा ने अपने राजनीतिक ढांचे में कभी नए समूह को जगह नहीं दी। स्पार्टा में शुरू से ही सरकार में सभी नागरिकों के लिए भूमिका थी। पुरातन काल के शुरुआती दौर में भी स्पार्टा की सभा राज्य का एक सक्रिय अंग थी। यूनानी देवता अपोलो की उपासना से जुड़े समारोह के अवसर पर सभा की बैठकें होने के विवरण मिले हैं। इसलिए स्पार्टा की सभा को कभी कभी "अपेला" भी कहते हैं।

स्पार्टा की परिषद एक शक्तिशाली कुलीनतांत्रिक निकाय थी जिसे "गेरोउसिया" कहते थे। इसमें 30 सदस्य थे। इसके दो सदस्य स्पार्टा के राजा होते थे। स्पार्टा में एक अनोखी तरह की राजशाही थी। दो भिन्न कुलों से जुड़े हुए दो राजा एक साथ राज करते थे। यह अपने आप में राजा के सीमित अधिकार का संकेत है।

राजा परिषद के ऐसे सदस्य थे, जिसे परिषद में कोई विशेषाधिकार प्राप्त नहीं था। बाकी 28 सदस्य कुलीन परिवारों से लिए जाते थे। यह 28 सदस्य जेरोन्टस कहलाते थे। सभी 60 साल या उससे ज्यादा उम्र के होते थे। इसके परिषद की सदस्यता जीवनपर्यंत होती थी। लेकिन बाद में उसे वार्षिक कर दिया गया। राज्य के मुख्य अधिकारी "एफोर्स" कहलाते थे। वहां पांच एफोर्स होते थे।

स्पार्टा के एफोर्स मजिस्ट्रेट होते थे जिनके पास कार्यपालिका, न्यायपालिका और पुलिस संबंधित शक्तियां होती थी। इन्हें नागरिकों के बीच से एक साल के लिए चुना जाता था। सभा की सदस्यता के साथ सैन्य कर्तव्य जुड़े थे। स्पार्टा में नागरिकों के युवा पुत्रों के सैन्य प्रशिक्षण का प्रावधान कठोर था। युवाओं को नागरिक के रूप में मान्यता पाने के लिए कठोर सैन्य प्रशिक्षण से गुजरना पड़ता था। स्पार्टा में नागरिकों को अत्यंत उच्च स्तर के कौशल में प्रशिक्षित किया जाता था। इस कारण स्पार्टावासी जमीनी युद्ध में एक अजय शक्ति बन गए थे।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

18वीं शताब्दी “अंधकार युग”

रोमन इतिहासलेखन परंपरा

उमरा वर्ग /अभिजात वर्ग