जापानी साम्राज्यवाद (1894 से 1945) || कोरिया और मंचूरिया

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                                                        जापानी साम्राज्यवाद (1894 से 1945) कोरिया और मंचूरिया मेजी काल की सबसे बड़ी पहचान राष्ट्रवाद थी। 19वीं सदी के उत्तरार्ध में जापान ने आधुनिकीकरण की शुरुआत की। यह माना गया कि जापान को बचे रहने के लिए आधुनिक सेना और मज़बूत औद्योगिक आधार ज़रूरी हैं। तोकुगावा काल में जापान दुनिया से काफ़ी कटा हुआ था। दूसरे देशों के साथ उसके संबंधों का रूप सबसे पहले पश्चिमी साम्राज्यवाद के संदर्भ से तय हुआ, जिसने संकट की भावना पैदा की। दरअसल विद्वान ई. एच. नॉर्मन आधुनिक जापानी राष्ट्रवाद को 'प्रतिक्रियात्मक राष्ट्रवाद' मानते हैं। यह राष्ट्र की चेतना और आधुनिक राज्य बनाने की तुरंत ज़रूरत का एहसास था, जो जापान में पश्चिम के सैन्य कब्ज़े या सांस्कृतिक उपनिवेशीकरण के डर से पैदा हुआ। इस तरह साम्राज्यवाद एक नए अंतरराष्ट्रीय माहौल की देन था। जापानी विस्तार एशियाई महाद्वीप पर केंद्रित रहा और खास तौर पर चीन और कोरिया के विर...

स्पर्टा नगर - राज्य और राजनीतिक संरचना

स्पार्टा का नगर-राज्य में कुछ हद तक और असामान्य सरकारें थी जिसमें राजतंत्र, कुलीनतंत्र और लोकतंत्र का मिश्रण था। इसकी सरकार का चरित्र कुलीनतांत्रिक था। एथेंस के विपरीत स्पार्टा ने अपने राजनीतिक ढांचे में कभी नए समूह को जगह नहीं दी। स्पार्टा में शुरू से ही सरकार में सभी नागरिकों के लिए भूमिका थी। पुरातन काल के शुरुआती दौर में भी स्पार्टा की सभा राज्य का एक सक्रिय अंग थी। यूनानी देवता अपोलो की उपासना से जुड़े समारोह के अवसर पर सभा की बैठकें होने के विवरण मिले हैं। इसलिए स्पार्टा की सभा को कभी कभी "अपेला" भी कहते हैं।

स्पार्टा की परिषद एक शक्तिशाली कुलीनतांत्रिक निकाय थी जिसे "गेरोउसिया" कहते थे। इसमें 30 सदस्य थे। इसके दो सदस्य स्पार्टा के राजा होते थे। स्पार्टा में एक अनोखी तरह की राजशाही थी। दो भिन्न कुलों से जुड़े हुए दो राजा एक साथ राज करते थे। यह अपने आप में राजा के सीमित अधिकार का संकेत है।

राजा परिषद के ऐसे सदस्य थे, जिसे परिषद में कोई विशेषाधिकार प्राप्त नहीं था। बाकी 28 सदस्य कुलीन परिवारों से लिए जाते थे। यह 28 सदस्य जेरोन्टस कहलाते थे। सभी 60 साल या उससे ज्यादा उम्र के होते थे। इसके परिषद की सदस्यता जीवनपर्यंत होती थी। लेकिन बाद में उसे वार्षिक कर दिया गया। राज्य के मुख्य अधिकारी "एफोर्स" कहलाते थे। वहां पांच एफोर्स होते थे।

स्पार्टा के एफोर्स मजिस्ट्रेट होते थे जिनके पास कार्यपालिका, न्यायपालिका और पुलिस संबंधित शक्तियां होती थी। इन्हें नागरिकों के बीच से एक साल के लिए चुना जाता था। सभा की सदस्यता के साथ सैन्य कर्तव्य जुड़े थे। स्पार्टा में नागरिकों के युवा पुत्रों के सैन्य प्रशिक्षण का प्रावधान कठोर था। युवाओं को नागरिक के रूप में मान्यता पाने के लिए कठोर सैन्य प्रशिक्षण से गुजरना पड़ता था। स्पार्टा में नागरिकों को अत्यंत उच्च स्तर के कौशल में प्रशिक्षित किया जाता था। इस कारण स्पार्टावासी जमीनी युद्ध में एक अजय शक्ति बन गए थे।

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