मार्टिन लूथर किंग JR.

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मार्टिन लूथर किंग JR. मार्टिन लूथर किंग का जन्म 15 जनवरी, 1929 को  अटलांटा, जॉर्जिया   में हुआ था। किंग ने  पेंसिल्वेनिया  के स्कूल में तीन साल तक पढ़ाई की। वहाँ उन्होंने अहिंसक विरोध के बारे में सीखा। 15 साल की उम्र में उन्होंने अटलांटा के  मोरहाउस कॉलेज   में दाखिला लिया तथा 1948 में स्नातक की उपाधि प्राप्त की। किंग ने 1955 में मैसाचुसेट्स में  बोस्टन विश्वविद्यालय  से डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की। 1954 में, किंग  मोंटगोमरी , अलबामा  में एक बैपटिस्ट चर्च के पादरी भी बने। कम उम्र में ही उनके माता-पिता ने उन्हें सिखाया कि अश्वेत होने से वे गोरों से अलग नहीं हो जाते, क्योंकि ईश्वर ने सभी मनुष्यों को समान बनाया है। उन्हें बचपन में ही भेदभाव का सामना करना पड़ा था। इसलिए, उनका एक सपना था कि वे एक दिन बड़े होकर इसे रोकेंगे। कॉलेज में दाखिला लेने के बाद उन्हें अपने विचारों को दुनिया के सामने व्यक्त करने का अवसर मिला। मार्टिन लूथर किंग को नागरिक अधिकार आंदोलन के सबसे महत्वपूर्ण अफ्रीकी-अमेरिकी नेताओं में से एक माना जाता है। वह अफ्रीकी-अमेरिकिय...

रोमन साम्राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था


रोमन साम्राज्य में 27 ई• पू• के बाद ऑक्टेवियन का राज्य काल आरंभ होता है। यह रोमन साम्राज्य का सर्वोच्च शासक बन गया। इसने "आगस्टस" की उपाधि धारण कर खुद को "प्रिंसेप" अर्थात राज्य का प्रथम एवं सर्वश्रेष्ठ नागरिक घोषित किया। यह "आगस्टस सीजर" के नाम से प्रसिद्ध हुआ। इसने रोमन राज्य का पूरा चरित्र बदल दिया। 27 ई• पू• गणतंत्र की समाप्ति को रेखांकित करता है। आगस्टस ने 14 ई• तक प्रिंसेप्स की हैसियत से रोम पर राज किया। वह एक स्थाई तानाशाही स्थापित करने में सफल रहा जो राजशाही में विकसित हो गई। इसने गणतंत्र की ज्यादातर राजनीतिक संस्थाएं बनाई रखी और सार्वजनिक अधिकारियों के पहले की ओहदे बरकरार रखें। इसने राज्य मे लंबे समय से जारी अस्थिरता का लंबा दौर खत्म किया।

आगस्टस की सरकार एक स्थाई सैनिक तानाशाही कही जा सकती है। सरकार मजिस्ट्रेट और सैनिक कमांडर को इंपिरियम (सर्वोच्च शक्ति) प्रदान करती थी। इंपिरियम किसी व्यक्ति को कार्यपालिका, न्यायपालिका या सेना से संबंधित कार्य के लिए प्रदान किया जाता था। यह उच्च अधिकारियों को किसी विशेष कार्य के लिए दिया जाता था, और यह स्पष्ट कर दिया जाता था कि इंपिरियम किस अवधि और किस क्षेत्र के लिए वैध है। प्रांतों के गवर्नर को संबंधित प्रांतों के प्रशासन के लिए इंपिरियम प्रदान किया जाता था। इसी तरह किसी सैनिक कमांडर का इंपिरियम सैन्य अभियान के काल तक ही सीमित था।

किंतु आगस्टस ने इंपिरियम को खुद तक सीमित कर दिया। इंपिरियम के स्वामी के रूप में उसे "इंपरेटर" या कमांडर की पदवी दी गई। आगस्टस का इंपीरियम अनिश्चितकाल के लिए था और वह पूरे साम्राज्य में वैध था। वह एकमात्र सैनिक कमांडर था जिसके पास इंपिरियम था।

आगस्टस ने प्रांतों को अपने और सीनेट के बीच बांट दिया। उसने सीनेट से गाल, स्पेन और सीरिया प्रांतों पर 10 साल के लिए नियंत्रण की मांग की। बाकी प्रांत सीनेट के प्रत्यक्ष प्रशासन में थे। इन तीनो प्रांतो ने आगस्टस को भरपूर मात्रा में वित्तीय संसाधन मुहैया करवाए जो उसकी स्थिति सुदृढ़ करने के लिए जरूरी था। उसने सीनेट के प्रशासन वाले प्रांतों में हमेशा दखलंदाजी की। उन प्रांतों में नियुक्तियां सम्राट की सहमति से करनी पड़ती थी। आगस्टस ने उसका इस्तेमाल प्रमुख पदों पर अपने वफादार लोगों को बैठाने में किया।

आगस्टस ने एक राजकीय नौकरशाही विकसित की। यह नौकरशाही सिर्फ सम्राट को जवाबदेह थी। नौकरशाही में भर्ती मुख्यत: अश्वारोहियों के बीच से की गई। अश्वारोहि वर्ग समाज के सुविधा संपन्न समूह थे और कोई धनी और प्रभावशाली व्यक्ति उसमें शामिल हो सकता था। आगस्टस ने अपनी नौकरशाही के निर्माण के लिए बड़ी हद तक इस वर्ग पर भरोसा किया।

आगस्टस ने सरकारी पदों पर अपनी जरूरत के हिसाब से उलट-फेर किया। इसने रोम की रक्षा के लिए सेना का इस्तेमाल करने के बजाय एक विशेष सशस्त्र बल का गठन किया जिसे "प्रिटारियन गार्ड" कहा जाता था। प्रिटारियन गार्ड के केंद्र में शाही अंगरक्षक थे। सैनिक कमांडरों ने आम तौर पर अपने कैंप मुख्यालयों पर अंगरक्षक तैनात किए। यह निजी अंगरक्षक प्रिटारियन गार्ड के नाम से जाने जाते थे। आगस्टस ने उच्च प्रशिक्षित एवं वफादार सशस्त्र टुकड़िया शामिल कर अपने प्रिटारियन गार्ड का विस्तार किया था और नौ दस्ते गठित किए। दस्ते पैदल सैनिक की टुकड़िया होती थी, जिसमें 600 सैनिक शामिल होते थे।

रोम में शांति बनाए रखने की जिम्मेदारी मजिस्ट्रेट को सौंपी गई जिसे "प्रीफेक्टस उर्बी" कहते थे। जब भी कोई रोमन राजा शहर से बाहर जाता तो यह सरकार का अस्थाई भार संभाला करता था। इसे राजधानी में गड़बड़ी और अशांति रोकने की जिम्मेदारी सौंपी गई। एक पुलिस बल उसकी सहायता करता था।

प्रिफेक्टस उर्बी एक ऐसा अधिकारी बन गया जिसके माध्यम से अन्य मजिस्ट्रेट सम्राट से संवाद स्थापित करते थे। आगस्टस ने अतिरिक्त पुलिस बल के रूप में "विजिलेज" या रात्रि प्रहरियों के सात दस्ते गठित किए। इन्हें एक अलग प्रीफेक्ट के अधीन रखा गया जो सीधे सम्राट के प्रति जवाबदेह थे। विजिलेज को रोम में अग्निशमन की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

शहर में असंतोष को नियंत्रित करने के लिए गरीब नागरिकों के बीच खाघान्नों का मुफ्त वितरण जरूरी था। एक विशाल साम्राज्य का स्वामी होने के कारण रोमन राज्य अपने राज्य के लोगों का पेट भरने के लिए भारी मात्रा में खाद्यान्न जूटाता था। आगस्टस ने समूची प्रणाली को चुस्त-दुरुस्त बनाया। अफ्रीका का प्रांत रोम के लिए अनाज का मुख्य आपूर्तिकर्ता बना। प्रशासन की एक अलग शाखा सार्वजनिक वितरण प्रणाली की देखरेख करती थी। एक अलग प्रीफेक्ट "प्रीफेक्टस एनोनी" उसका प्रमुख था। गणतंत्र काल में जनगणना अनियमित हो गई थी, आगस्टस ने उसे नियमित किया। मुफ्त रसद पाने की योग्यता जनगणना से निर्धारित हुई क्योंकि जनगणना में नागरिकों की संपत्ति के बारे में सूचनाएं भी शामिल की जाती थी।

आगस्टस ने सीनेट के सदस्यों की संख्या कम कर सुधार प्रक्रिया चलाई। सीनेट की संख्या 800 से घटाकर 600 कर दी गई। उसके अतिरिक्त सम्राट अपने अधिकारियों के माध्यम से सीनेट की कार्रवाई नियंत्रित करता था। आगस्टस ने नए क्षेत्र जीतने के बजाय साम्राज्य को सुदृढ़ करने पर अपना ध्यान केंद्रित किया। सम्राट ने मिस्त्र में शासन चलाने के लिए एक अधिकारी "प्रीफेक्टस इजिप्टी" नियुक्त किया था।

स्पेन रोम के सबसे पुराने प्रांतों में से एक था। आगस्टस ने प्रांत के प्रशासन का पुनर्गठन किया और उस क्षेत्र में बसने वाले कबीलो पर प्रभुत्व स्थापित किया। स्पेन में रोमनो को बसाया गया, नए उपनिवेश स्थापित किए गए और जमीन के एक बड़े हिस्से में खेती शुरू की गई। यही नीति गाॅल में भी लागू की गई। स्पेन और गाॅल में विशाल भूखंड वजूद में आए जिन्हें लैटीफुंडिया कहा गया। मिस्र और सीरिया के विलय से भूमध्यसागर क्षेत्र का एकीकरण हुआ जिसने समुद्री व्यापार को बढ़ावा दिया। भूमध्यसागर क्षेत्र में रोमन सेना मजबूत हुई, जिसने व्यापार में बाधा पहुंचाने वाले समुद्री डाकू पर रोक लगाई।

शांति बहाली में मिली सफलता ने आगस्टस को सीनेट की ज्यादा से ज्यादा शक्ति अपने हाथ में केंद्रित करने का मौका दिया। सीनेट सम्राट का प्रतिरोध नहीं कर सकता था क्योंकि वह रोमन गणतंत्र में जारी हिंसक उथल-पुथल शांत करने में असक्षम था। आगस्टस की मृत्यु 14 ईसवी में हुई। सम्राट की मृत्यु के बाद कोई भी शासक सुचारु रुप से रोमन साम्राज्य को 96 ई• तक नहीं चला सका। 

96 ई• में सीनेट की ओर से "नर्वा" को सम्राट नियुक्त किया गया। नर्वा ने अपने जीवनकाल में ही अपना उत्तराधिकारी मनोनीत करने की प्रथा शुरू की। इसने 80 साल तक सत्ता का सुगम हस्तांतरण सुनिश्चित किया। सम्राट का चुनाव उनकी प्रशासनिक क्षमताओं की जांच परख के बाद होने लगा। अनेक इतिहासकारों ने नर्वा और उसके चार उतराधिकारियों को "अच्छा सम्राट" और 96 से लेकर 180 ई• के काल को साम्राज्य का "स्वर्ण काल" माना है। अच्छे सम्राटों का चयन आम सहमति के आधार पर होता था।


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