एनाल्स (Annals)
एनाल्स इतिहास एक समग्र इतिहासलेखन का उपागम था। एनाल्स में उस समय प्रचलित सभी प्रवृत्तियां इतिहासवादी और प्रत्यक्षवादी, व्यक्तिवादी एवं समूहवादी, समाज और संस्कृति, आर्थिक एवं राजनीतिक मुद्दे और घटनाएं, नदी सागरों का इतिहास, इत्यादि सभी सम्मिलित थे। एनाल्स स्कूल का नामकरण 1929 ई. में आरंभ फ्रेंच हिस्टोरिकल जर्नल Annale d’ histoire economique et sociale के आधार पर हुआ। 1929 से ही एनाल्स स्कूल का प्रभाव इतिहासलेखन एवं पद्धतियों में स्पष्ट दिखाई देने लगा। इस जर्नल के संस्थापक फ्रांसीसी इतिहासकार Lucien Febvre और Marc Bloch थे। ये दोनों ही बाद में एनाल्स स्कूल के पथ प्रदर्शक बने। बाद में अन्य इतिहासकार Fernand Braudel, Jacques le goff , Robert Mandrou एवं Emmanuel le Roy Ladurie इसमें शामिल हो गये। इतिहासकारो के इस समूह ने एकीकृत सामाजिक एवं सांस्कृतिक इतिहास लिखकर एनाल्स स्कूल को एक सुव्यवस्थित ढांचा प्रदान किया। एनाल्स इतिहासलेखन एक समग्र इतिहास लेखन था जिसमें अतीत की घटनाओं के सभी पक्ष सामाजिक, सांस्कृतिक, भौतिक, आर्थिक, मनोवैज्ञानिक, वातावरणिक, जनसांख्यिकीय आदि सम्मिलित थे।
एनाल्स परम्परा मात्र दार्शनिक विचारधारा न होकर अतीत की समस्याओं तक पहुंचने की एक ऐतिहासिक पद्धति है। इसमें सिद्धान्तों के स्थान पर शोध पद्धति पर बल दिया गया। ऐतिहासिक अध्ययन के पारम्परिक दृष्टिकोण से अलग हट कर इसमें ऐतिहासिक समस्याओं को सुलझाने का प्रयास किया गया। किसी घटना के घटित होने में यह परम्परा कई कारणों को जिम्मेदार मानती है। इस पद्धति में साधारण घटनाओं को भी महत्व दिया गया है। वस्तुनिष्ठता को महत्व देते हुए एनाल्स परम्परा में विषयवस्तु का विश्लेषण किया गया है। एनाल्स परम्परा में राजनीतिक इतिहास से परहेज किया है मगर राजनीति से जुड़े सामाजिक एवं सांस्कृतिक मुद्दों को शामिल किया गया है। एनाल्स इतिहास में परम्परावादी इतिहास से अलग हटकर एक समग्र इतिहास लिखने का प्रयास किया है। इसके अनुसार ऐतिहासिक घटनाएं अलग-अलग करके नहीं समझी जा सकतीं। इन घटनाओं को एक साथ जोड़कर ही इन्हें समझा जा सकता है। एनाल्स परम्परा का मानना है कि ऐतिहासिक समस्याओं के समाधान के लिये इतिहास के स्रोतों से सही प्रश्न पूछे जाने चाहिये। समस्या की प्रकृति को ध्यान में रखते हुये तथ्य एकत्रित करने चाहिये। एनाल्स स्कूल ऑफ हिस्ट्री ने शोध की गुणवत्ता के लिए अध्ययन की विभिन्न पद्धतियों को तोड़कर एक सार्वभौमिक पद्धति अपनाने पर बल दिया।

पृष्टभूमि:- 1920 के दशक में विश्वयुद्ध समाप्त हो चुका था और फ्रांस ने अपने प्रतिद्वंद्वी जर्मनी के ऊपर विजय प्राप्त कर ली थी। फ्रांस के महान प्रभाववादी चित्रकार Claude Monet ने अपनी अत्यंत मशहूर कृति Le Nympheas और The Water Lilies को विजय के बाद फ्रांस को भेंट किये गये फूलों के एक गुलदस्ते के रूप में चित्रित किया और एकदम पेरिस के मध्य में 'L.Orangerie' नामक संग्रहालय बनाया गया जहाँ इसका प्रदर्शन किया जा सके। लेकिन कुछ समय बाद महान आर्थिक मंदी की छाया मंडराने लगी थी और यह तय था कि यह मंदी जल्द ही सारी दुनिया के समाज और अर्थव्यवस्था को अपनी चपेट में ले लेगी और फ्रांस भी उन्हीं देशों में से एक था। यह बिलकुल नयी स्थिति थी जिसने एक ऐसा सवाल खड़ा कर दिया था जिसे एक नये जवाब की जरूरत थी। नये जवाबों के लिए नई पद्धतियों का इस्तेमाल आवश्यक बन गया। इतिहासलेखन की इसी जरूरत ने Annale d’ histoire economique et sociale की स्थापना को रेखांकित किया। इसके अलावा इसका एक बौद्धिक संदर्भ भी था। 19वीं शताब्दी में अनेक नए विषयों ने जन्म लिया जिसमें सामाजिक और सांस्कृतिक मानव विज्ञान, मानव भूगोल और मनोविज्ञान उल्लेखनीय थे। ये विषय बिलकुल नये और ऊर्जा से भरे थे। पूर्व के इतिहासकारों ने केवल राजनैतिक इतिहास पर बल दिया जैसे एक शासक ने दूसरे शासक को हटाकर सत्ता अपने हाथ में ले ली। एनाल्स के मानव विज्ञानियों और भूगोल के विद्वानों ने महसूस किया कि इतिहासकारों ने इन तथ्यों की अवहेलना की। वस्तुगत सच्चाई मानवीय व्यवहारों, उनकी आदतों, और जीवन में उपस्थित स्थितियों के अंदर भी छुपी होती है। 'समाज विज्ञान' कि यही दृष्टि अब उभर कर सामने आ रही थी जो इतिहास के दायरे से अब तक बाहर थी।
इतिहास पर हुए इस प्रहार ने दो युवा इतिहासकारो को काफी बेचैन कर दिया। Lucien Febvre और Marc Bloch ने जिस तरह का इतिहास पढ़ा था और जिस तरह का इतिहास पढ़ाने के लिए उन्हें मजबूर किया जाता था इससे वे बहुत अप्रसन्न थे। इसके अलावा नए-नए विषयों से जो अंतर्दृष्टि मिल सकती थी उनके प्रति वे काफी संवेदनशील थे। वे इस बात से असंतुष्ट थे कि जो विषय एक दूसरे के इतने घनिष्ठ हो सकते हैं, वे एक दूसरे के शत्रु बने हुए हैं। जनवरी 1929 में उन्होंने एक नयी पत्रिका 'Annale d’ histoire economique et sociale' का प्रकाशन शुरू किया। प्रारंभ में इस पत्रिका ने समकालीन मुद्दों पर अपना ध्यान केन्द्रित किया ताकि पैदा हो रहे संकट की जड़ों तक पहुँचा जा सके और उन्हें समझा जा सके। समय बीतने के साथ इसने बड़ी तेजी से मध्यकालीन और प्रारंभिक आधुनिक इतिहास पर भी अपना ध्यान केन्द्रित किया।
पत्रिका में लिखे गये संक्षिप्त संपादकीय में इन दोनों ने अत्यंत प्रभावकारी ढंग से इसकी जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने लिखा की 'इसमें कोई शक नहीं कि अगर कोई व्यक्ति अपनी खुद की विशेषज्ञता में डूबा हुआ बड़ी मेहनत के साथ अपने हिस्से के खेत की जुताई में लगा हो और इसके साथ ही अपने पड़ोसी को समझने का भी प्रयास करे, तो यह अच्छा ही होगा। लेकिन एक दूसरे से अलग करने वाली दीवारें अकसर इतनी ऊंची उठा दी जाती हैं कि हम एक दूसरे को देख भी नहीं पाते। इस पर ही आर्थिक इतिहास का भविष्य निर्भर करता है और तथ्यों की सही जानकारी भी इस पर ही निर्भर करती है जो आने वाले कल में 'समग्र इतिहास' का रूप ले सकेगी।’
'समग्र इतिहास' वह चीज थी जिसे आंशिक इतिहास के स्थान पर एनाल्स तैयार करना चाहता था। यही 'सच्चा इतिहास' भी होगा। 'समग्र इतिहास' और 'सच्चा इतिहास' इस विषय के क्षेत्र को विस्तार देते थे। अतीत का कोई भी हिस्सा और कोई भी पहलू इसके अध्ययन क्षेत्र से बाहर नहीं था। इस प्रकार अन्य विषयों की चुनौती का मुकाबला करने तथा इन विषयों की अंतर्दृष्टि को अपने में समाहित करने की गुंजाइश पैदा की गयी।
Lucien Febvre और Marc Bloch ने समाज में मानव जीवन की घटनाओं को गहन एवं विस्तृत रूप से विश्लेषित किया। इनसे पूर्व Henri Bergson ने 1900 ई. में 'Review of historical synthesis' नामक पत्रिका आरंभ की। Bergson ने समाज में मानवीय क्रियाकलापों को संकलित करने के उद्देश्य से सौ भागों में Evolution of Humanity नामक पुस्तक लिखने की योजना बनाई। किंत वह अपनी यह परियोजना पूर्ण न कर सके, फिर भी उन्होंने एनाल्स इतिहास लेखन के लिये मार्ग अवश्य प्रशस्त कर दिया। Lucien Febvre एनाल्स स्कूल के प्रमुख संस्थापक थे। उन्होंने ऐतिहासिक अध्ययन में भिन्न-भिन्न स्रोतों के उपयोग की पैरवी की। Febvre ने प्रारंभ में 'Strasberg' में अध्यापन कार्य किया बाद में वे आर्थिक इतिहास का अध्ययन करने के लिये ‘Sorbonne’ विश्वविद्यालय चले गये। द्वितीय विश्वयुद्ध के समय वे ब्राजील के नगर Rio de Janeiro में गये एवं वहां उन्होंने अपने विचारों से कई इतिहासकारों को प्रभावित किया। इससे एनाल्स परम्परा भी आगे बढ़ी। कुछ समय Febvre ने ‘Collage de France’ में भी अध्यापन कार्य किया।
Lucien Febvre की प्रथम महत्वपूर्ण कृति ‘Regions of France: French Comte’ थी। भौगोलिक विशिष्टतायें इस कृति की प्रमुख विषय वस्तु थीं। Febvre की अगली कृति Phillippe ll and French Comte 1911 में आयी। इस कृति में सामाजिक एवं आर्थिक पक्षों को प्रमुखता दी गई। 1922 में उनकी अगली पुस्तक 'The Earth and Social Evolution’ आई। ऐतिहासिक घटनाओं में उन्होंने भौगोलिक कारकों को महत्वपूर्ण माना। 1928 ई. में उनकी अगली कृति 'Martin Luthur’ पर थी। इससे इतिहासलेखन में जीवन गाथा के प्रयोग को नई राह मिली। उन्होंने सांस्कृतिक इतिहास पर भी एक कृति लिखी। इसमें उन्होंने आधुनिक यूरोप के पुनर्जागरणः पर बौद्धिक विचारों के प्रभाव का अध्ययन किया। इस प्रकार विभिन्न कृतियों के माध्यम से Febvre ने इतिहास को अन्य दूसरे विषयों - समाजशास्त्र, मनोविज्ञान, भूगोल एवं पारिस्थितिक विज्ञान से सम्बंधित किया।
Marc Leopold Benjamin Bloch का जन्म 6 जुलाई, 1886 को फ्रांस के लियो नामक शहर में एक यहूदी परिवार में हुआ था। Marc Bloch, Lucien Febvre के अनुयायी थे। उन्होंने अपने उत्कृष्ट योगदान से ऐतिहासिक शोध में क्रांतिकारी परिवर्तन किये। Bloch ने अपना अध्यापन जीवन 1914 में Strasberg विश्वविद्यालय से आरंभ किया। बाद में Sorbonne विश्वविद्यालय में अध्यापक नियुक्त हुए। उन्होंने विश्वयुद्धों में भाग लिया। Bloch ने 27 वर्ष की आयु में परम्परागत इतिहासलेखन से हटकर 1913 में अपनी प्रथम कृति 'The Island of France’ की रचना की। उन्होंने वहां की मिट्टी, जलवायु, भाषा, पुरातात्त्विक अवशेषों एवं स्थापत्य कला आदि पक्षों का विवरण प्रस्तुत किया। 1944 ई. में उन्होंने 'The Royal Touch' की रचना की।
इस कृति द्वारा उन्होंने इतिहास लेखन में क्रांतिकारी परिवर्तन किया। इसमें आम जीवन के विविध पक्षों को शामिल किया। उदाहणार्थ इसमें बताया है- उस समय एक त्वचा रोग ‘स्क्रोफ्युला’ होता था। लोगों की मान्यता थी कि यदि राजा इस व्यक्ति को स्पर्श कर ले तो वह व्यक्ति रोग मुक्त हो जाएगा। इसीलिये यह रोग राजा के अनिष्ट (King's evil) के रूप में भी जाना जाता है। इसके आधार पर उन्होंने बताया कि किस तरह और क्यों राजभक्ति का फैलाव हुआ ? क्यों इंलैण्ड एवं फ्रांस की आम जनता राजा को दैवीय प्रतिनिधि मानती है। इस प्रकार इस पुस्तक में Bloch ने मध्यकाल में राजाओं की योग्यता (दैवीय प्रतिनिधि की मान्यता) पर जनता के विश्वास को दिखाया।
इस प्रकार Bloch ने असाधारण मुद्दों एवं विषयों पर ध्यान केन्द्रित किया। Bloch ने अपनी उल्लेखनीय पुस्तक 'The French Rural History’ (1924 ई.) में फ्रांस के मध्यकालीन ग्रामीण समाज का आलोचनात्मक वर्णन किया है। इसमें कृषि संबंधी तकनीकें, औजारों का प्रयोग, मिट्टी की प्रकृति, लोगों के व्यवहारों का स्थानीय समुदायों से संबंध, एवं सिचाई तकनीकों का विवरण दिया गया है। Bloch को सर्वाधिक प्रसिद्धि 1940 में प्रकाशित उनकी कृति 'The Feudal Society‘से मिली। इसमें उन्होंने दासता की उत्पत्ति के उपरान्त यूरोप में सामंती समाज के विकास एवं उसकी प्रवृति की व्याख्या प्रस्तुत की है। उन्होंने सामंती समाज के परिवर्तनशील पक्षों को दिखाने के लिये बहुत सारे तथ्यों और सूचनाओं को एकत्रित कर उन्हें रोचक ढंग से सजाया है। द फ्यूडल सोयाइटी में कृषि, समाज, पारिस्थितिकी, तकनीकी और कानूनी कारणों द्वारा किस प्रकार यूरोपीय सामंती समाज की उत्पत्ति हुई इस पर प्रकाश डाला गया है। इसमें चर्च की भूमिका एवं लोगों के सामान्य विश्वास की भी विवेचना की गई है।

Bloch ने अपनी पुस्तक द फ्यूडल सोसाइटी की रचना के लिए सामंतवाद के सभी पहलुओं पर ध्यान देकर इसके अध्ययन का समग्र और विशाल ढांचा खड़ा किया। उन्होंने फ्रांस के ग्रामीण क्षेत्रों में काफी समय बिताया ताकि उस समाज के अवशेषों को बारीकी से समझ सके। यह काम उन्होंने वहाँ के वीरान पड़े खेतों तथा सांस्कृतिक मूल्यों के स्तर पर भी किया। दूसरी तरफ Lucien Febvre भावनाओं और विश्वासों के क्षेत्र में अन्वेषण करने के लिए उत्सुक दिखायी दिए। अपनी पुस्तक ‘The Problem of Unbelief in the Sixteenth Century, The Religion of Rabelais’ (1942) में उन्होंने फ्रांसुआ रेबेला नामक एक केन्द्रिय चरित्र को लिया जो ईसाई धर्म का कटु आलोचक था और जिसमें उसकी आस्था नहीं थी। नए-नए क्षेत्रों में इतिहास के विस्तार के मामले में उनका विख्यात लेख ‘Sensibility and History, How to Reconstitute the Emotional life of the Past’ एक उल्लेखनीय काम था।
इतिहास जगत में Bloch का महानतम योगदान उनकी अपूर्ण रचना ‘The Historian's Craft’ है। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जब वे जर्मनी की जेल में थे तब उन्होंने इसका लेखन किया। यह कृति योजनाबद्ध शैली में ऐतिहासिक समस्याओं के अध्ययन हेतु एक महत्वपूर्ण पथप्रदर्शक है। उनका मानना था कि इतिहासकार को बांसुरी बनाने वाले के जैसा कार्य करना चाहिये न कि मशीन प्रचालक जैसा। उनका कहना था कि इतिहास का प्रमुख कार्य अतीत एवं वर्तमान के मध्य एक सम्बन्ध बनाना है जो वास्तव में मानक मूल्यों की उन्नति में सहायक है। Bloch की रुचि तुलनात्मक ऐतिहासिक विश्लेषण में थी, जिसके द्वारा उन्होंने मानव सभ्यता के महत्व का भलीभांति अध्ययन किया।
एनाल्स के प्रारंभिक अन्वेषणों ने पर्याप्त रुचि पैदा की और मनोवृत्तियों के अध्ययनों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। विद्वान Michel Vovelle ने चर्च के दस्तावेजों में सुरक्षित रखे वसीयतों की छानबीन की ताकि मध्यकालीन और शुरुआती आधुनिक फ्रांस में मृत्यु के प्रति परिवर्तित होती मनोवृत्तियों को जाना जा सके। Jacques Le Goff ने अपने प्रतिष्ठित लेख ‘Church time and merchant time in the Middle Ages’ में यह पता करने की कोशिश की कि मध्यकालीन युग में समय के प्रति लोगों की प्रवृत्तियाँ किस प्रकार बदल रही थीं। चर्च का समय अंतरिक्षीय, अपरिमेय था, ब्रह्मांड के निर्माण से फैसले के दिन तक जिसका विस्तार था। दूसरी तरफ किसी व्यापारी के लेन देन के लिए ऐसे समय की जरूरत थी जो निश्चित हो, जिसे दिन के हिसाब से मापा जा सके और जो एक ऐसी वस्तु हो जिसे व्यापारिक लेन देन के जरिए बेचा जा सके। यूरोप में मध्यकाल में इन दोनों के बीच का संघर्ष एक प्रमुख सामाजिक संघर्ष था। एनालवादी इतिहासलेखन की परंपरा में Le Goff एक महान व्यक्तित्व थे जिन्होंने इस पंरपरा की सीमाओं का मनोवृत्तियों के इतिहास के क्षेत्र तक विस्तार किया।
यही स्थिति 1996 में अपनी मृत्यु तक Georges Duby की थी। मध्यकालीन यूरोप के संदर्भ में भूमि और श्रम के इतिहास से शुरू कर Duby ने शादी -व्याह, परिवार और महिलाएँ, गिरिजाघर और मध्यकालीन कल्पनाओं खासतौर पर मध्यकालीन समाज को संचालित करने वाले मूल्यों के अध्ययन पर ध्यान दिया। द्वितीय विश्वयुद्ध के पश्चात एनाल्स स्कूल के क्षेत्र में विस्तार हुआ। इस परम्परा को गति प्रदान करने में Fernand Braudel, Keith Thomas, Pierre Chaunu एवं E lee ray ladurée की अहम भूमिका थी।
जनसाख्यिकीय आंकड़ों, चर्च पंजिकाओं एवं अन्य सम्बन्धित अभिलेखों को प्राथमिक स्रोतों के रूप में प्रयुक्त किया गया। नवीन-नवीन स्रोतों की खोज के साथ साथ विद्वानों ने अपना ध्यान स्रोतों से उठ रहे नए-नए प्रश्नों पर भी केन्द्रित किया।
Lucien Febvre और Marc Bloch का अनुसरण करते हुए Fernand Braudel ने एनाल्स इतिहास लेखन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 1949 ई. में ब्रॉडेल की प्रख्यात कृति ‘The Mediterranean and the Mediterranean World in the Age of Philip II’ प्रकाशित हुई। इस कृति में उनका एनाल्स दृष्टिकोण प्रखरता के साथ दिखाई देता है। इस कृति ने उन्हें फ्रांसीसी इतिहासलेखन के शीर्ष पर स्थापित किया। Braudel जब जर्मनी में 1940 से 1945 के मध्य कैदी के रूप में रहे उस समय उन्होंने इस पुस्तक की रचना की। इसमें कुल छह लाख शब्द थे। इस रचना का वास्तविक प्रकाशन 1972 में हुआ। Braudel की एक अन्य रचना Magnum Opus थी जिसके लिए उन्होंने विविध स्रोतों का भरपूर उपयोग किया। इस कृति में अधिकांश द्वितीयक स्रोतों की मदद ली गई है। प्राथमिक स्रोतों के रूप में भूमध्यसागरीय वातावरण का उपयोग किया गया। Braudel का स्रोतों, सामग्री की भाषाओं-जर्मन, स्पेनिश, इटालियन एवं फलेमिश (बेल्जियम) पर पूर्ण नियंत्रण था। इससे तथ्यों के संग्रह एवं उनके प्रस्तुतिकरण में निखार आया। अभिलेखीय स्रोतों की प्राप्ति हेतु उन्होंने रोम, जिनेवा, फ्लोरेंस, पेरिस एवं सिमान्कास के संग्रहालयों में उपलब्ध सामग्री का उपयोग किया। Braudel की यह कृति तीन भागों में विभाजित है जिसमें एनाल्स परम्परा को देखा जा सकता है। 1960-70 के मध्य Braudel का 'फ्रेंच स्कूल ऑफ हिस्ट्री' पर भी गहरा प्रभाव था।
एनाल्स स्कूल के अन्य इतिहासकारों में E lee ray ladurée का महत्वपूर्ण स्थान है। इन्होंने Braudel की कई तकनीकों का उपयोग किया। उनकी उत्कृष्ट कृति 'The Territory of the Historian’ है। उन्होंने ऐतिहासिक शोध हेतु विभिन्न समस्याओं को प्रस्तुत किया है। मौसम संबंधी विवरण, वातावरण संबंधी इतिहास एवं पर्यावरण संकट का अध्ययन उनके ऐतिहासिक शोध के नवीन विषय थे। उनके द्वारा ग्रामीण ऐतिहासिक अंकणों के विश्लेषण में गणना करने की तकनीक का प्रयोग किया गया। एनाल्स स्कूल के एक अन्य इतिहासकार Pierre Chaunu थे। Braudel के नमूने पर ही उन्होंने अपनी कृति ‘Atlantic Trade’ लिखी। 1955 से 1960 के बीच अपनी पत्नी की सहायता से उन्होंने बारह भागों में इस कृति का सृजन किया। इस पुस्तक में 1501 से 1650 ई. तक अमेरिका के नये विश्व और स्पेन के मध्य व्यापार की उन्नति एवं अवनति का विवरण दिया गया है। उन्होंने संचार साधनों की परिवर्तित समस्याओं के बावजूद भी व्यापार के प्रति वैश्विक दृष्टिकोण अपनाया है।
अन्य इतिहासकार Ernest Labrousse ने भी अपनी रचना ‘The Crisis of the French Economy at the end of the Ancient Regime and the beginning of the Revolution’ (1944) में इतिहास की ऐसी दीर्घकालिक प्रवृतियों को ढूँढने का प्रयास किया, जो आर्थिक और सामाजिक परिवर्तन को समझने में और एक हद तक उसके भविष्य का अनुमान लगाने में मदद कर सके। Labrousse का निष्कर्ष था कि औद्योगिक व्यवस्था के विपरीत, जहाँ ज़रूरत से ज़्यादा उत्पादन आर्थिक संकट को जन्म देता हो, कृषि के क्षेत्र में अनाज का ज़रूरत से कम उत्पादन संकट की ऐसी स्थिति पैदा करता है जिसका प्रभाव अर्थव्यवस्था और समाज के अन्य क्षेत्रों पर पड़ता है।
विद्वान Philippe Aries खुद को 'नौसिखिया' इतिहासकार कहना पसंद करते थे क्योंकि जिस समय वह एक इतिहासकार थे उस समय भी इस पेशे से बाहर थे। वह इतिहास में कुछ प्रमुख नये विषयों के प्रवर्तक थे। उन्होंने मृत्यु की भावना तथा बच्चों के प्रति रुख को ऐतिहासक छानबीन का विषय माना। उन्होंने लैंगिकता के मुद्दों, घरेलू और परस्पर आंतरिक संबंधों पर जोर देते हुए परिवार के इतिहास को केंद्र में ला दिया। उन्होंने अपनी पुस्तक ‘Centuries of Childhood’ (1962) में बचपन और इसकी पृथक ज़रूरतों की मान्यता के इतिहास की खोज की क्योंकि अब तक बच्चों को महज वयस्क के एक छोटे रूप के तौर पर देखा जाता था। अपनी दूसरी पुस्तक ‘The Hour of Our Death’ (1981) में मृत्यु के बारे में सोच पर विचार किया। सामाजिक इतिहास की पुनर्व्याख्या में ये महत्त्वपूर्ण हस्तक्षेप थे।
समाज के हाशिए पर जो समूह पड़े थे उनके प्रति काफी समय से इतिहासकारों का एक आकर्षण था लेकिन 1960 और 1970 के दशक तक यह धारणा नहीं बन सकी थी कि हाशिए पर होना क्या है और मुख्यधारा के समाज से इसका संबंध क्या है। हाशिए पर पड़े लोग केवल वही नहीं थे जो गरीब और साधनहीन थे बल्कि वे भी थे जो समाज की क्षेत्रीय सीमाओं, गांवों में, झोपड़ी में या जंगलों और पहाड़ों में बसते थे बल्कि वे भी थे जिनकी जिंदगी के तौर तरीके मजबूरी में या मुख्यधारा के लोगों के तौर तरीकों से भिन्न थे। मिसाल के तौर पर भिखमंगे, पागल, साधु, चोर और डकैत। दार्शनिक Michel Foucault को इस बात का श्रेय जाता है जिन्होंने इस समस्याग्रस्त श्रेणी के लिए अपनी पुस्तकों ‘Discipline and Punish and Madness and Civilization’ में कुछ मानदंड निर्धारित किये। उन्होंने कहा कि हाशिए पर रहने वालों का अध्ययन इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि यह मुख्यधारा का 'अन्य' पहलू है।

आगे चलकर एनाल्स के तहत सांस्कृतिक-मानसिक एवं मनो इतिहास का अध्ययन हुआ। Roger Chartier ने फ्रांसीसी क्रांति की सांस्कृतिक उत्पत्ति को खोजने के प्रयास किये। इसके अलावा उन्होंने पुस्तक प्रकाशन, पाठन-प्रकृति एवं मुद्रण की शैली के विकास को भी अपने अध्ययन की विषयवस्तु बनाया। Le goff ने मानसिक समस्याओं को अपने अध्ययन में ध्यान दिया। सामुदायिक व्यवहार कैसे नियंत्रित होता है। सामुदायिक व्यवहार का क्या प्रभाव पड़ता है। नवीन स्थितियों के लिये समाज कहां तक उत्तरदायी है? ऐसे प्रश्नों पर Le goff ने अपना ध्यान केन्द्रित किया। Natalie Davis एवं अन्य इतिहासकारों ने आधुनिक फ्रांसीसी लोगों के वर्गिक लक्षणों पर बल दिया। लोगों के ऐतिहासिक, मानसिक एवं सामाजिक व्यवहार की व्याख्या का प्रयास किया। उन्होंने एक व्यक्ति समाज एवं भीड़ के व्यवहार का भी अध्ययन किया। काल्पनिक प्रेम, हंसी एवं अन्य साधारण विषय आज फ्रेंच इतिहासकारों के अध्ययन की विषय वस्तु बन गये हैं।
एनाल्स राजनीतिक इतिहास के अलावा अन्य सभी विषयों को अपने में शामिल करता है। बिना राजनीति के अतीत की समस्त घटनाओं को समझना आसान नहीं है। राजनीतिशास्त्र एवं उसकी सामाजिक गतिविधियां मानव सभ्यता के विकास की कुंजी हैं। एनाल्स राजनीतिक घटनाओं को नकारते हुए सामाजिक घटनाओं की व्याख्या करने पर ध्यान देता है, जबकि बिना राजनीति के सामाजिक घटनाक्रम को समझना आसान नहीं है। यह विशेषज्ञता का युग है, ऐसे में किसी घटना को समग्र रूप में देखना आसान नहीं है। एनाल्स अपने शोध में कई विषयों को लाया, इससे इतिहास प्रत्येक वस्तु का विषय बन गया। इसमें कुछ विषयों पर तो अधिक प्रकाश डाला गया एवं कुछ को कल्पना द्वारा प्रस्तुत किया गया।
वास्तव में, Febvre और Bloch का मानना था कि इतिहासकार तभी अतीत के ज्ञान को समृद्ध कर सकता है जब वह समाजविज्ञान, भूगोल, मनोविज्ञान, और अर्थशास्त्र से मुक्त रूप से जानकारी लेने के लिए तत्परता दिखाए। हालांकि, इसका मतलब दस्तावेजों या विद्वतापूर्ण सरोकारों का निरादर नहीं है, और दोनों इतिहासकारों ने निष्पक्षता के सर्वोच्च मानदंडों पर जोर दिया। किसानों के जीवन को उजागर करने के लिए यहां तक कि कानूनी और मठ संबंधी दस्तावेज भी खोले गए, क्योंकि इस तरह के दस्तावेज आने वाली पीढ़ियों के लिए जान-बूझकर तैयार नहीं किए गए थे, और जिनमें न्यायिक जांचों और अदालती मुकदमों के दौरान राज्य तथा वास्तविक लोगों का जीवन आपस में टकराता था। Bloch और Febvre का लिखा इतिहास "वह इतिहास है जो समाज विज्ञानों के लिए खुला था, घटनाओं की कहानियां मात्र होने के बजाय समस्या-उन्मुखी और विश्लेषणात्मक था, और राजनीति के साथ-साथ आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन से जुड़ा था।'
एनाल्स स्कूल की स्थापना 20वीं शताब्दी में इतिहासलेखन की परंपरा में एक महत्त्वपूर्ण घटना थी। इतिहासकारों ने विषय और पद्धति में निरंतर नयी-नयी खोजों के जरिए समय-समय पर इतिहासलेखन से जुड़े व्यवहार को पुनर्परिभाषित किया। इस स्कूल के इतिहासकारों ने आर्थिक संरचना का इतिहास, दीर्घकालीन विकास का इतिहास, मनोवृति का इतिहास, लघु इतिहास और सांस्कृतिक इतिहास जैसे तमाम क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया।
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