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जापान पर अमेरिकी अधिकार (1945–1952)

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  जापान पर अमेरिकी अधिकार (1945–1952) दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जापान एशिया के अन्य देशों पर कब्ज़ा करके अपनी ताकत बढ़ाना चाहता था। जापान ने 1931 में मंचूरिया पर हमला किया और 1937 में चीन पर आक्रमण करके दूसरा चीन-जापान युद्ध शुरू किया। जापान, जर्मनी और इटली के साथ मिलकर 'धुरी शक्तियों' (एक्सिस पावर्स) का हिस्सा बना। 7 दिसंबर 1941 को जापान ने अमेरिका के पर्ल हार्बर नौसैनिक अड्डे पर हमला किया, जिसके बाद अमेरिका भी युद्ध में शामिल हो गया। अगस्त 1945 में अमेरिका ने हिरोशिमा और नागासाकी शहरों पर परमाणु बम गिराए, जिसमें बहुत लोग मारे गए और भारी तबाही हुई। इसके तुरंत बाद, 15 अगस्त 1945 को जापान ने आत्मसमर्पण कर दिया और जापान के लिए दूसरा विश्व युद्ध खत्म हो गया। यह सिर्फ एक सैन्य हार नहीं थी, बल्कि मेइजी काल से चले आ रहे शाहीतंत्र के अंत की शुरुआत भी थी। युद्ध के बाद अमेरिकी सेना ने जापान पर कब्ज़ा किया और बड़े बदलाव शुरू किए। इस दौरान जापान की राजनीति, अर्थव्यवस्था और समाज में जबरदस्त बदलाव आया। अमेरिका के जनरल डगलस मैकआर्थर के नेतृत्व ने पूरे देश को बदल दिया। डगलस का मकसद था -स...

एंड्रयू जैकसन की नीतियाँ एवं कार्य

प्रश्न:- एंड्रयू जैकसन की नीतियों एवं कार्यों का विस्तार से वर्णन कीजिए। परिचय:- एंड्रयू जैक्सन ने अमेरिकी राजनीति को बहुत समय तक प्रभावित किया। उसने एक चुंबक की भांति अपने मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित किया। जैक्सन ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत दक्षिण कैरोलिना की संवैधानिक सभा के सदस्य के रूप में की। लेकिन जैक्सन को राजनीतिक जीवन की अपेक्षा सैनिक जीवन अधिक पसंद था। अत: व स्थानीय सेना में भर्ती हो गया। 1813-14 में उसने क्रिकों को पराजित किया जिससे उसे मेजर जनरल का पद मिल गया। आगे चलकर अंग्रेजी सेना को पराजित करने से उसकी गणना महान विजेताओं में होने लगी। 1821 में उसे फ्लोरिडा का सैनिक गवर्नर बनाया गया, लेकिन उसने शीघ्र ही परित्याग कर दिया। 1823 में वह सीनेट का सदस्य निर्वाचित हुआ, लेकिन 1825 में उसने इससे भी इस्तीफा दे दिया। 1824 में राष्ट्रपति के पद के लिए उन्हें चुनाव में सबसे अधिक मत मिले लेकिन ऐडम्स और किले की साजिश के कारण कांग्रेस में उन्हे विजय नहीं मिल पाई। 1828 में जॉन क्विंसी ऐडम्स को पराजित कर वह राष्ट्रपति बने।  अपने उद्घाटन भाषण में जैक्सन ने घोषणा की थी कि संघीय प्रशास...

मुगल दरबार में फारसी भाषा का विकास

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मुगल दरबार में फारसी भाषा का विकास  भारत में फ़ारसी भाषा का उद्भव मुगल साम्राज्य में हुआ क्योंकि पहला मुगल सम्राट बाबर अफ़ग़ानिस्तान से आया था। फ़ारसी ईरान की मूल भाषा थी और अफ़ग़ानिस्तान में भी इसका इस्तेमाल किया जाता था। इस वजह से जब मुगल भारत आए, तो वह अपने साथ फ़ारसी भाषा भी लाए। मुगल साम्राज्य में फ़ारसी भाषा का इस्तेमाल दरबारी कामों और लेखन के लिए किया जाता था। यह भाषा मुगल साम्राज्य के प्रशासन, संस्कृति और साहित्य की आम भाषा बन गई। मुगल काल के विभिन्न ऐतिहासिक दस्तावेजों, कला, वास्तुकला और साहित्य में फारसी का प्रयोग किया जाने लगा, जिसमें मुगल साम्राज्य के संस्थापक बाबर की प्रसिद्ध आत्मकथा बाबरनामा भी शामिल है। पृष्ठभूमि: मुगल शासक तुर्क-मंगोल मूल के थे, जिनकी मातृभाषा तुर्की थी। मध्य एशिया में उनके साम्राज्य के विस्तार के दौरान, वे फारसी संस्कृति और साहित्य के संपर्क में आए और फारसी उनकी दूसरी भाषा बन गई। ईरान में सफाविद वंश का शासन था। मुगल और सफाविद वंश के बीच सांस्कृतिक संबंध थे। इस संबंध के कारण फारसी भाषा भारत में और अधिक प्रचलित हुई। इसीलिए मुगल दरबार मे...

कू क्लक्स क्लान (Ku Klux Klan)

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कू क्लक्स क्लान कू क्लक्स क्लान इस गुप्त संगठन की स्थापना सन् 1866 में हुई थी। इसकी स्थापना टेनेसी के छोटे से शहर पुलास्की में प्रमुख स्थानीय वकीलों और राजनेताओं के बेटों द्वारा की गई थी। यह संगठन जब बना तो इसका स्वरूप एक समाजसेवी था औरे गोरे नवयुवक इसके सदस्य थे। बाद में यह संगठन असामाजिक कार्रवाइयों में लिप्त होकर बदनाम हो गया। इस बदनाम संगठन ने दक्षिण के काले लोगों पर जुल्म ढाना शुरु कर दिया। इनकी गैरकानूनी अदालत की सुनवाई के बाद काले अपराधीयों पर कोड़े बरसाए जाते, उसे गोली मार दी जाती या कभी-कभी फाँसी पर भी लटका दिया जाता। इस प्रकार की हरकतों के पीछे का मुख्य कारण "अश्वेत पुनर्निर्माण" के प्रति रोष प्रकट करना था, साथ ही ये घटनाएँ काले लोगों को अपने बराबर का नागरिक मानने के बारे में गोरे लोगों की अस्वीकृति का भी संकेत थीं। कू क्लक्स क्लान 1870 तक दक्षिण के सभी राज्यों में फैल गया और रिपब्लिकन पार्टी की पुनर्निर्माण युग की नीतियों के खिलाफ़ श्वेत दक्षिणी विरोध का वाहक बन गया, जिसका उद्देश्य अश्वेत अमेरिकियों के लिए राजनीतिक और आर्थिक समानता स्थापित करना था। इसके सदस्यों न...

आधुनिक भारत में इतिहासलेखन || Women's and Gender (वाद-विवाद)

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आधुनिक भारत में इतिहासलेखन ||Women's and Gender (वाद-विवाद) भारतीय पारंपरिक इतिहास मुख्य रूप से पुरुषों के संदर्भ में लिखा गया है लेकिन 19वीं शताब्दी के मध्य से प्रारंभ हुए सामाजिक सुधार कार्यों ने महिलाओं की स्थिति और उनके इतिहास पर जोर दिया। हालाँकि यह सुधार कार्य भी बड़े पैमाने पर पुरुषों द्वारा ही शुरू किया गए। इन सुधार कार्यों ने लिंग के प्रश्न पर चिंताजनक बहस को जन्म दिया। साथ ही 1920 के दशक में महिला आंदोलन ने जोर पकड़ा जिसके परिणामस्वरूप महिलाएँ इतिहास की प्रमुख वस्तु-विषय बन गईं। स्वतंत्रता संग्राम में महिलाओं की भागीदारी में वृद्धि होने लगी। हालाँकि इसने महिलाओं के लिए समानता की मांग नहीं की क्योंकि राष्ट्रवादी आंदोलन ने भारतीय समाज की पितृसत्तात्मक प्रकृति को खत्म करने का प्रयास नहीं किया। इसने केवल आम लोगो की महिलाओं के प्रति धारणा को बदल दिया और नए पितृसत्तात्मक मॉडल को फिर से स्थापित किया। सुधार आंदोलन और राष्ट्रवादी आंदोलन दोनों का महिला प्रश्न और लिंग संबंधों के साथ एक जटिल रिश्ता रहा है। औपनिवेशिक और आधुनिक भारत के अध्ययन में इसके बारे में कई ऐतिहासिक बदलाव स्पष्ट ...

भारत विभाजन के दौरान महिलाओं की स्थिति

भारत विभाजन के दौरान महिलाओं की स्थिति भारत में ब्रिटिश उपनिवेश के 200 से अधिक वर्षों के शासन के बाद भारत ने 15 अगस्त 1947 को अपनी स्वतंत्रता प्राप्त की। हालाँकि, वर्षों के संघर्ष के बाद, स्वतंत्रता प्राप्त करने का उत्साह जल्दी ही खत्म हो गया, जब भारतीय उपमहाद्वीप का भारत और पाकिस्तान के रूप में विभाजन हुआ। देश के विभाजन को कई लोग भारतीयों के प्रति अंग्रेजों का अंतिम प्रहार मानते हैं। हालाँकि, विभाजन के पीछे के कारण विविध और जटिल थे। विभाजन के बाद हुए सांप्रदायिक दंगों के कारण महिलाओं को काफी हिंसा का सामना करना पड़ा। विभाजन के दौरान हुए सांप्रदायिक दंगों में लैंगिक हिंसा विद्यमान रही। इस जातीय नरसंहार में दो तरह की लिंग आधारित हिंसा देखी गई। सबसे पहले, विपरीत धार्मिक समूह के पुरुषों द्वारा महिलाओं पर की जाने वाली हिंसा जिसमें अपहरण, बलात्कार और जननांगों को विकृत करना या सार्वजनिक रूप से अपमानित करना शामिल था। इस तरह की हिंसा का कथित उद्देश्य महिलाओं के प्रतिद्वंद्वी धर्म के पुरुषों को नीचा दिखाना था। महिलाओं के खिलाफ हिंसा का दूसरा रूप महिलाओं पर उनके अपने परिवार के सदस्यों द्वारा की ...